हमारे देश में बड़ी संख्या में लोग थायरॉयड की समस्या से जूझ रहे हैं, जिनमें अधिकांश महिलाएं शामिल हैं। चिंताजनक बात यह है कि बहुत से लोगों को यह भी पता नहीं होता कि वे इस बीमारी से ग्रस्त हैं। थायरॉयड एक ऐसी ग्रंथि है जो हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा उत्पादन को नियंत्रित करती है। जब यह ग्रंथि सही ढंग से काम नहीं करती, तो शरीर की कई क्रियाएं प्रभावित होती हैं और इसका असर हमारी दिनचर्या से लेकर मानसिक स्वास्थ्य तक पर पड़ता है।
थकान और आलस हो सकता है थायरॉयड का संकेत
यदि आप रोजाना पर्याप्त नींद ले रहे हैं लेकिन फिर भी सुबह उठने पर अत्यधिक थकान और आलस महसूस करते हैं, तो इसे सामान्य कमजोरी या तनाव समझने की गलती न करें। यह थायरॉयड हार्मोन की कमी, यानी हाइपोथायरायडिज्म का संकेत हो सकता है। इस स्थिति में थायरॉयड ग्रंथि पर्याप्त हार्मोन (T3 और T4) नहीं बनाती, जिससे शरीर की ऊर्जा उत्पादन प्रक्रिया धीमी हो जाती है। नतीजतन, व्यक्ति हमेशा थका हुआ, सुस्त और काम में रुचि न लेने वाला महसूस करता है।
बिना कारण वजन बढ़ना और ठंड अधिक लगना
थायरॉयड हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करते हैं। जब इनकी मात्रा कम हो जाती है, तो शरीर कैलोरी को तेजी से बर्न नहीं कर पाता, जिससे वजन बढ़ने लगता है। साथ ही, इन हार्मोनों की कमी से शरीर का तापमान भी प्रभावित होता है, जिसके कारण व्यक्ति को सामान्य से अधिक ठंड लगती है, जबकि आसपास के लोग आरामदायक महसूस करते हैं।
त्वचा और बालों पर भी दिखता है असर
थायरॉयड की समस्या का असर केवल अंदरूनी नहीं बल्कि बाहरी रूप से भी दिखाई देता है। हार्मोनल असंतुलन के कारण त्वचा रूखी, बेजान और खुजलीदार हो जाती है। बाल झड़ने लगते हैं और पतले होने लगते हैं। कई बार नाखून भी कमजोर होकर टूटने लगते हैं।
जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द
हाइपोथायरायडिज्म से पीड़ित लोगों में अक्सर सुबह उठने पर जोड़ों में अकड़न और मांसपेशियों में दर्द की शिकायत होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि शरीर की ऊर्जा आपूर्ति में कमी आने से मांसपेशियों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता।
मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
थायरॉयड हार्मोन का सीधा असर दिमाग के कार्यों पर भी पड़ता है। इसकी कमी से व्यक्ति डिप्रेशन, मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता की कमी (ब्रेन फॉग) का अनुभव कर सकता है। कई बार व्यक्ति छोटी-छोटी बातों पर अत्यधिक भावुक या परेशान हो जाता है।
अनदेखा करना हो सकता है खतरनाक
थायरॉयड से संबंधित लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने से वजन बढ़ना, हृदय रोग, डिप्रेशन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। यदि लगातार छह सप्ताह तक थकान, आलस, वजन बढ़ना या ठंड अधिक लगने जैसे लक्षण बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और TSH टेस्ट करवाएं।
थायरॉयड एक नियंत्रित करने योग्य बीमारी है, बशर्ते इसे समय रहते पहचाना और इलाज किया जाए। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर जांच से आप इस समस्या से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है और किसी भी प्रकार की चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी निर्णय लेने से पहले योग्य डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें। प्रस्तुत जानकारी की सत्यता, प्रभाव या परिणामों की RNI कोई पुष्टि या जिम्मेदारी नहीं लेता।