नई दिल्ली : कई बार कुछ तस्वीरें ऐसी होती है, जो बिना कहें भी बहुत कुछ कह जाती है। इसके लिए तो ना किसी शब्द की जरूरत होती है और ना उसके विवरण की। हालांकि हम आपके सामने आज जिन तस्वीरों को लेकर आ रहें है, उसे देखकर एक पल तो आप हैरान हो जाएंगे, लेकिन जब आप इन तस्वीरों के पीछे की कहानी को जानियेगा, तो वो आपको और अधिक हैरत में डालेगा।

तस्वीर में आप देख सकते है एक शख्स कुर्सी पर बैठा हुआ है, जिसके शरीर पर वस्त्र नहीं है। बड़े-बड़े बाल है, बड़े-बड़े दाढ़ी है और नाखून भी बड़े-बड़े। वहीं कुछ लोग उसके पैरों को साफ कर रहे है, जो मल से दबा हुआ है। आपको बता दें कि ये पूरा मामला गुजरात के राजकोट का है। जहां एक एनजीओ की संस्थापक जल्पाबेन ने बताया कि उनको शनिवार शाम एक फोन आया था। जिसके जरिये उन्हें बताया गया कि पिछले कई सालों से यहां एक घर में तीन भाई-बहन कमरे में बंद हैं।

इसके बाद इस संस्था ने उन तीनों भाई-बहनों को मुक्त कराने का जिम्मा उठाया और वे वहां पहुंचे। जब वे उस मकान पर पहुंचे तो किसी ने कोई दरवाजा नहीं खोला। क्योंकि तीनों के पिता नवीन मेहता उनके लिए होटल पर खाना लेने के लिए गए थे। फिर गेट को तोड़कर अंदर पहुंचे तो वहां से बदबू आई तो हम बाहर की ओर भागे। लेकिन फिर सोचा जो काम करने के लिए आए हैं वो करना भी जरूरी है।

एनजीओ के लोग मुंह पर रुमाल लगाकर कमरे में अंदर पहुंचे वहां अंधेरा था। टॉर्च से देखा तो तीनो भाई बहन की हालत देखकर हैरान थे। कमरे में चारों तरफ उनका मल जमा हुआ था। जगह-जगह बासी रोटी और सब्जी का ढेर लगा हुआ था। तीनों के शरीर हड्डियों का ढांचा बन चुका था और उनके तन पर कोई कपड़ा नहीं था। इस बाबत जब लोगों ने तीनों बच्चों की हालत के पीछे की वजह जाननी चाही तो पिता नवीन मेहता ने पूरी काहनी बताई।

उन्होंने कहा कि करीब 10 साल पहले मेरी पत्नी और तीनों बच्चों की मां का निधन हो गया था। मां के गुजरने के बाद से तीनों की हालत बिगड़ती गई और मानसिक हालत खराब हो गई। इसके चलते कोई पड़ोसी घर में नहीं आता था। पहले बड़े बेटे के दिमाग पर असर हुआ और उसके बाद छोटे बेटे पर। दोनों की देखरेख बेटी करती थी, लेकिन कुछ समय बाद उसकी हालत भी बिगड़ गई। तीनों कमरे में बदं रहने लगे, जब कोई आता तो वह उसके साथ मारपीट करने लग जाते। जिसके चलते उन्हें बंद कर दिया था।
बता दें कि तीनों काफी पढ़े-लिखे हैं, जहां एक भाई ने एलएलबी, दूसरा बी.कॉम और बहन साइकोलॉजी की डिग्री ली हुई है। तीनों की उम्र 30 से 42 वर्ष के बीच है। पिता ने बताया कि उनके तीनों बच्चे पढ़ने लिखने में बहुत होशियार थे। जब तीनों की डिग्रियां दिखाईं तो सब हैरान थे। उन्होंने बताया कि उनका बड़ा बेटा अंबरीश (42) बीए एलएलबी करके प्रैक्टिस करता था। वहीं छोटा बेटा भावेश ने बी.कॉम के साथ साथ क्रिकेटर था और स्थानीय टूर्नामेंट में भी खेलता था। जबकि 39 साल की बेटी मेघा ने मनोविज्ञान की डिग्री ली थी और वह एक निजी कॉलेज में पढ़ाती थी।

आपको बता दें कि पिता नवीन रिटार्यड सरकारी कर्मचारी हैं। वह रोजाना अपने बच्चों को होटल से लेकर खाना खिलाते थे। उन्होंने बताया कि तीनों बच्चों का काफी इलाज कराया, लेकिन कहीं कोई फायदा नहीं हुआ। पिता नवीन ने बताया कि उन्हें लगता है कि रिश्तेदारों ने उनके बच्चों पर टोटका किया हुआ है। पिता नवीन ने बताया कि तीनों बच्चे अपनी मां से बेहद प्यार करते थे। जब मां बिछड़ी तो उनकी हालत ऐसी हो गई।

एनजीओ की मदद से आसपास के लोगों ने तीनों भाई-बहन को पहले नहलाया, इसके बाद उनके कपड़े बदले गए। फिर नाई को बुलाकर तीनों के बाल बनवाए गए। इसके बाद तीनों को खाना खिलाया गया। आपको बता दें कि ये मामला रविवार का है। रविवार के दिन ही NGO ने इन तीनों बेटा और बेटियों को कमरे से आजाद कराया था।