गोरखपुर। गोरक्षपीठ के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 29 सितंबर को गोरखनाथ मंदिर में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाले कार्यक्रम में संत समाज और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 23 सितंबर से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा और 24 सितंबर से समसामयिक विषयों पर सम्मेलन की शुरुआत हुई। इसी क्रम में 29 सितंबर को महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में मुख्य श्रद्धांजलि सभा होगी।
महंत दिग्विजयनाथ ने गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर के रूप में लंबे समय तक दायित्व संभाला। उनके सार्वजनिक जीवन में धार्मिक गतिविधियों के साथ शिक्षा, सामाजिक जागरण, राष्ट्र और लोककल्याण से जुड़े विषयों को भी प्रमुख स्थान मिला। उनके जीवन और कार्यों को लेकर गोरक्षपीठ से जुड़े संस्थानों और अनुयायियों की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए उनके योगदान को याद किया जाता है।
महंत दिग्विजयनाथ के जीवन में शिक्षा को विशेष महत्व मिला। महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। समय के साथ इस संस्था के माध्यम से गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न शिक्षण संस्थानों का विस्तार हुआ। शिक्षा परिषद के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा, चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा से जुड़े संस्थान संचालित किए जा रहे हैं। इससे पूर्वांचल में शिक्षा के क्षेत्र में संस्थागत विकास को बढ़ावा मिला।
उपलब्ध विवरणों के अनुसार महंत दिग्विजयनाथ का जन्म 1894 में मेवाड़ क्षेत्र में हुआ था और बचपन में उनका नाम नान्हू सिंह था। उनका प्रारंभिक जीवन गोरखपुर की गोरक्षपीठ से जुड़ा रहा। तरुणावस्था में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से संबंधित गतिविधियों में भाग लिया। असहयोग आंदोलन के दौरान भी उनकी सक्रियता का उल्लेख मिलता है। ब्रिटिश शासन के दौर में क्रांतिकारियों से संबंधों को लेकर भी उनका नाम चर्चा में रहा।

अयोध्या में राम जन्मभूमि से जुड़े आंदोलन के शुरुआती दौर में भी महंत दिग्विजयनाथ की भूमिका का उल्लेख किया जाता है। बाद के वर्षों में उनके उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ ने इस विषय को आगे बढ़ाया। गोरक्षपीठ की यह भूमिका आगे भी सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से जारी रही।
महंत दिग्विजयनाथ ने सार्वजनिक जीवन में राजनीति के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे हिंदू महासभा से जुड़े और संगठनात्मक स्तर पर विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। वर्ष 1961 में वे अखिल भारतीय हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष निर्वाचित हुए। वर्ष 1967 में वे गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। इसके दो वर्ष बाद 1969 में उनका निधन हुआ।
महंत दिग्विजयनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित होने वाली श्रद्धांजलि सभा में उनके जीवन, सामाजिक योगदान और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों को याद किया जाएगा। कार्यक्रम में संत समाज और श्रद्धालुओं की सहभागिता रहेगी।गोरखनाथ मंदिर में आयोजित यह कार्यक्रम महंत दिग्विजयनाथ की स्मृतियों और उनके द्वारा स्थापित संस्थागत परंपराओं को याद करने का अवसर होगा।
अंकित श्रीवास्तव की रिपोर्ट