नई दिल्ली : एक तरफ जहां मीडिया संस्थान इस महामारी के विकट स्थिति में भी अपने कर्मचारियों के तनख्वाह काटने और उनके शोषण करने में लगा है। वहीं दूसरी तरफ मीडिया के दो बड़े समूहों ने अपने यहां काम करने वाले किसी भी कर्मचारी की कोरोना से मौत पर तत्काल उनके परिवार को सहायता देने की बात कही है। वहीं खबरों की मानें तो ये दोनों संस्था अपने कर्मचारियों की हरसंभव मदद कर रहे है, जिससे वे इस महामारी से बच सकें और लड़ सकें।
दरअसल कोरोना जैसी इस बुरी स्थिति में भी पत्रकार अपने परिवार और भविष्य को लेकर अधर में डूबा हुआ है। इसके बावजूद भी विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले कई कर्मचारी जान जोखिम में डालकर सेवाएं दे रहे है। मीडिया जगत के इन्हीं सब गतिविधियों के बीच ऐसी स्थिति में दो बड़े समूह सामने आए हैं, जिन्होंने कहा है कि वो हर स्थिति में अपने कर्मचारी के साथ खड़े हैं। इसमें दैनिक भास्कर समूह औऱ लोकमत समूह है।

दैनिक भास्कर के प्रबंधकों ने कहा है कि किसी भी कर्मचारी की कोरोना से अगर मौत होती है तो उसके परिजनों को पूरे साल की तनख्वाह दी जाएगी और संस्थान के कल्याण फंड की तरफ से 7 लाख रुपए अलग से दिए जाएंगे, वहीं लोकमत समूह ने कहा कि कोरोना से मौत होने पर वो अपने कर्मचारी को दस लाख रुपए की तत्काल सहायता देगा।

मीडिया के क्षेत्र में इन समूहों ने बड़ी दरियादिली दिखाई है ठीक उस समय जब पत्रकारों की लगातार मौतें हो रही हैं और उनके परिजनों को आर्थिक संबल की जरूरत थी। इसे लेकर दैनिक भास्कर और लोकमत समूह से अन्य मीडिया संस्थानों को भी सीख लेने की जरूरत है। अगर ये व्यवसायिक मुद्दों पर एक राय हो सकते हैं तो फिर कर्मचारी हितों पर कोई निर्णय अगर लिया जाता है तो उसपर सभी मीडिया संस्थान एक राय क्यों नहीं हो सकते।