नई दिल्ली : बिहार में शराबबंदी कानून लागू हुए कई साल गुजर गये, लेकिन अभी भी वहां चोरी छिपे शराब की अवैध बिक्री हो रहीं थी। जिसे लेकर कई खबरें भी सामने आ चुकी है। इन्हीं सारी खबरों को लेकर पटना के एसपी मद्य निषेध ने गुप्त तरीके से एक अभियान चलाया, जिसने पूरे शराबबंदी कानून की पोल खोल कर रख दी। हालांकि उनके इस अच्छे काम का नतीजा ये निकला की उनका तबादला कर दिया गया।
मद्य निषेघ एसपी के तबादले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बड़ा हमला किया है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा कि, ” पटना के एसपी मद्य निषेध ने सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को पत्र लिखा कि उत्पाद और पुलिस विभाग के अधिकारी सत्ताधारी जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर शराब बिक्री करवा रहे हैं। सीएम आवास में पहुंच रखने वाले शराब माफिया ने सीएम से अब उस एसपी का तबादला करवा दिया। यही है नीतीश कुमार का असली चेहरा।”
गौरतलब है कि एसपी मद्य निषेध राकेश कुमार सिन्हा ने 6 जनवरी को सूबे के सभी एसपी और एसएसपी को पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने शराबबंदी कानून को लेकर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि उत्पाद अफसरों की मिलीभगत से पूरे प्रदेश में शराब का अवैध धंधा जोरशोर से चल रहा है।
उन्होंने उत्पाद विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़ा करते हुए कहा था कि उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर, दारोगा और सिपाही के संपत्ति की जांच होनी चाहिए। उनके साथ ही उनके रिश्तेदारों के चल-अचल संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए। साथ ही उनका लोकेशन भी ट्रेस किया जाना चाहिए।
हालांकि, एसपी मद्य निषेध के लिखे इस पत्र पर संज्ञान लेने के बजाये 19 जनवरी को DGP एसके सिंघल ने निरस्त का पत्र थमा दिया। इस बाबत पुलिस मुख्यालय से एक अधिसूचना भी जारी की गई, जिसमें यह बताया गया था कि गुप्त परिवाद विषय में प्राप्त पत्र को निरस्त किया जाता है। पत्र निरस्त करने के साथ ही 19 तारीख को ही एसपी मद्य निषेध राकेश कुमार सिन्हा का तबादला कर दिया गया।
आपको बता दें कि मद्य निषेध विभाग से हटाकर कर उन्हें पटना स्पेशल ब्रांच का एसपी बना दिया गया है।