{ स्वतंत्र पत्रकार प्रणव गोस्वामी की कलम से }
सेंट्रल दिल्ली में एक ऐसा मोहल्ला है जहां पुलिस भी अपना कदम रखने से डरती है। वहां देश का कानून नहीं चलता है, अगर वहां किसी का चलता है तो सिर्फ सरकार विरोधी गुंडागर्दी। वो मोहल्ला कोई और नहीं, बल्कि दिल्ली का शाहीन बाग है।

शाहीन बाग अब किसी परिचय का मोहताज नहीं है। आपको भले ही नहीं पता हो कि, शाहीन बाग दिल्ली के किस विधानसभा इलाके में आता है, या फिर वहां जाने का रास्ता कौन सा है? लेकिन दुनियाभर के लोगों को पता है कि दिल्ली का शाहीन बाग आजकल CAA, NRC और NPR को लेकर अपने विरोधी तेवर के लिए एक जाना- पहचाना केंद्र बनकर तेजी से उभरा है।
लोकतंत्र की हत्या
CAA, NRC और NPR के विरोध के नाम पर पिछले 15 दिसंबर से शाहीन बाग में शुरू हुआ प्रदर्शन 50 दिनों बाद भी लगातार जारी है। शाहीन बाग में महिलाओं की आड़ में विरोध प्रदर्शन का तांडव चल रहा है इसके पीछे कौन लोग हैं? इनका मकसद क्या है यह जानना बेहद जरूरी है। क्योंकि विरोध प्रदर्शन करने वाले लोग भारत का संविधान, भीमराव अंबेडकर और महात्मा गांधी के नाम पर पिछले 50 दिनों से एक खास इलाके को बंधक बनाकर रखा है। ये वही लोग हैं जो कभी भारत माता की जय और वंदे मातरम बोलने से कतराते थे। लेकिन आज शाहीन बाग में विरोध करने वाले लोग इसी राष्ट्रगान की आड़ में लोकतंत्र की हत्या कर रहे हैं। शाहीन बाग में CAA, NRC और NPR के खिलाफ विरोध- प्रदर्शन तो हो रहे हैं लेकिन विरोध करने वालों को कोई ये नहीं बता रहा है कि CAA, NRC और NPR है क्या? और ना ही सरकार विरोधी ये तत्वों को इसे जानने में कोई दिलचस्पी है।
हाईजैक हुई शाहीन बाग की सड़क
दिल्ली औऱ नोएडा को जोड़ने वाली शाहीन बाग की सड़क को सरकार विरोधी ताकतों ने एक महीने से भी ज्यादा समय से हाईजैक किया हुआ है। एक खास साजिश के तहत प्रदर्शकारी तिरंगे और संविधान के नाम पर सड़क को बंधक बनाकर रखा है। ये वही लोग हैं जो लोकतंत्र बचाने की बात करते हैं लेकिन खुद ही लोकतंत्र को तोड़ने का काम कर रहे हैं। दिल्ली, नोएडा और फरीदाबाद जाने वाले लोग इस प्रदर्शन से पूरी तरह प्रभावित हैं। स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र और ऑफिस जाने वाले तमाम लोग इस विरोध- प्रदर्शन से खासे प्रभावित हो रहे हैं। लेकिन ये प्रदर्शनकारी CAA, NRC और NPR के नाम पर एक गंदा खेल- खेल रहे हैं। स्कूली बच्चे पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और अब उनकी बोर्ड की परीक्षा सर पर है लेकिन इन प्रदर्शनकारियों को इससे कोई मतलब नहीं है। दूसरी तरफ बीमार लोगों को भी इस रास्ते के बंद होने से अस्पताल जाने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन यह आंदोलन समाप्त होने के बजाए बढ़ता ही जा रहा है।
शाहीन बाग पर दो फाड़ में देश के पत्रकार
शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ हो रहे विरोध- प्रदर्शन में देश के पत्रकारों में भी दो फाड़ है। विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग कुछ खास पत्रकारों को ही शाहीन बाग में आने दे रहे हैं उनकी खातिरदारी कर रहे हैं। जबकि बाकी पत्रकारों को वहां जाने की एंट्री नहीं दे रहे हैं। इससे कहीं ना कहीं लग रहा है कि इन विरोध प्रदर्शन के पीछे कोई बड़ी साजिश रची जा रही है। क्योंकि पिछले दिनों शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन कवर करने गए एक टेलीविजन पत्रकार के साथ हाथापाई की गई थी जबकि दूसरे दिन वहां के हालात का जायजा लेने के लिए गए दो पत्रकारों को बैरिकेट के अंदर नहीं जाने दिया गया। उनसे पासपोर्ट मांगा गया, ऐसा लगा मानों शाहीन बाग किसी दूसरे देश में है और वहां जाने के लिए पासपोर्ट की जरूरत है। जबकि बाकी पत्रकारों की तरह ही ये पत्रकार भी शाहीन बाग का जायजा लेने के लिए गए थे, उनकी समस्या से अवगत होने के लिए गए थे। उनकी परेशानी जानना चाह रहे थे लेकिन वहां की उग्र भीड़ ने दोनों ही पत्रकारों को शाहीन बाग में घुसने नहीं दिया, उनके खिलाफ नारेबाजी की गई। CAA और NRC को लेकर उनदोनों पत्रकारों से कोई बात करने के लिए राजी नहीं हुआ। जबकि पत्रकारों का एक धड़ा ऐसा भी है जिसे वहां जाने पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं है। ये बातें साफ जाहिर करती है कि इस विरोध-प्रदर्शन की आड़ में शाहीन बाग में कोई बड़ा खेल खेला जा रहा है।
शाहीन बाग पर बॉलीवुड में भी दो फाड़
पत्रकारों की तरह बॉलीवुड में भी शाहीन बाग को लेकर दो फाड़ है। बॉलीवुड का एक धरा ऐसा है जो शाहीन बाग में चल रहे विरोध– प्रदर्शन के समर्थन में है और समय- समय पर वहां का मंच शेयर कर लोगों में आग लगाने का काम कर रहे हैं। लेकिन कोई भी CAA और NRC का विरोध कर रहे लोगों को समझाने का काम नहीं कर रहे हैं कि CAA और NRC है क्या? कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो देश में वामपंथी विचारधारा के लोग एकजूट होकर देश और इस सरकार के खिलाफ कोई बड़ी साजिश रच रहे हैं।