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उम्मीदवारों के खिलाफ अपराधिक मामलों को सार्वजनिक नहीं करने पर SC ने लगाया BJP-कांग्रेस समेत 10 राजनीतिक दलों पर जुर्माना

चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के अपराधिक रिकॉर्ड मीडिया में प्रकाशित न करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 10 पार्टियों को दोषी माना है। दरअसल पिछले साल बिहार में हुए चुनाव के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी राजनीतिक दल किसी प्रत्याशी को टिकट देने के 48 घंटे के भीतर अखबार और टीवी में उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी प्रकाशित करें। पार्टी अपनी वेबसाइट पर भी प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड डाले।

By: Amit ranjan 
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उम्मीदवारों के खिलाफ अपराधिक मामलों को सार्वजनिक नहीं करने पर SC ने लगाया BJP-कांग्रेस समेत 10 राजनीतिक दलों पर जुर्माना

नई दिल्‍ली : चुनाव के दौरान उम्मीदवारों के अपराधिक रिकॉर्ड मीडिया में प्रकाशित न करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 10 पार्टियों को दोषी माना है। दरअसल पिछले साल बिहार में हुए चुनाव के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि सभी राजनीतिक दल किसी प्रत्याशी को टिकट देने के 48 घंटे के भीतर अखबार और टीवी में उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी प्रकाशित करें। पार्टी अपनी वेबसाइट पर भी प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड डाले।

अगर अपराध के किसी आरोपी को टिकट दिया है तो चुनाव आयोग को यह बताएं कि उसी उम्मीदवार को टिकट क्यों दिया गया। इसके कुछ महीनों बाद हुए चुनाव में ज़्यादातर पार्टियों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद 2 याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग और अलग-अलग पार्टियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मुकदमा दाखिल किया।

आज इस मामले पर जस्टिस रोहिंटन नरीमन और बी आर गवई की बेंच ने फैसला दिया। कोर्ट ने माना कि कुछ पार्टियों ने आदेश का आंशिक रूप से पालन किया। उन्होंने आपराधिक छवि के लोगों को टिकट दिया। इसकी कोई संतोषजनक वजह आयोग को नहीं बताई। कम पहचाने अखबारों में प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड छपवा कर औपचारिकता पूरी की। जबकि 2 पार्टियों ने आदेश का बिल्कुल पालन नहीं किया। कोर्ट के नोटिस के जवाब में उन्होंने इसके लिए अपनी राज्य इकाई के भंग होने का बहाना बनाया।

इस याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत ने कई बार कानून बनाने वालों को आग्रह किया कि वे नींद से जगें और राजनीति में अपराधीकरण रोकने के लिए कदम उठाएं। लेकिन, वे लंबी नींद में सोए हुए हैं।

शीर्ष न्‍यायालय ने कहा कि कोर्ट की तमाम अपीलें बहरे कानों तक नहीं पहुंच पाई हैं। राजनीतिक पार्टियां अपनी नींद से जगने को तैयार नहीं हैं। कोर्ट के हाथ बंधे हैं। यह विधायिका का काम है। हम सिर्फ अपील कर सकते हैं। उम्मीद है कि ये लोग नींद से जगेंगे और राजनीति में अपराधीकरण को रोकने के लिए बड़ी सर्जरी करेंगे।

किस पर कितना जुर्माना?

कोर्ट ने इस बहाने को स्वीकार नहीं किया और सीपीआई (एम) और एनसीपी पर 5-5 लाख का जुर्माना लगाया है। वहीं कोर्ट ने भाजपा, कांग्रेस, भारतीय कम्‍युनिस्‍ट पार्टी, बसपा, जदयू, राजद, आरएसएलपी और लोजपा को भी अवमानना का दोषी माना है। हालांकि, कोर्ट ने कहा है कि यह उसके आदेश के बाद हुआ पहला चुनाव है। इसलिए, वह कठोर दंड नहीं देना चाहता। ऐसे में इन पार्टियों पर 1-1 लाख का जुर्माना लगाया गया है।

भविष्य के लिए कोर्ट ने दिया निर्देश:-

  1. राजनीतिक दल अपनी वेबसाइट पर प्रत्याशियों के आपराधिक रिकॉर्ड डालें
  2. चुनाव आयोग विशेष मोबाइल ऐप बनाए. जहां मतदाता ऐसी जानकारी देख सके
  3. मतदाताओं को जागरूक बनाने के लिए अभियान चलाए जाएं
  4. चुनाव आयोग इस आदेश का पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष सेल बनाए
  5. पार्टी प्रत्याशी चुनने के 48 घंटे के भीतर आपराधिक रिकॉर्ड मीडिया में प्रकाशित करे. ऐसा प्रकाशन नामांकन दाखिल करने की पहली तिथि से 2 हफ्ते से ज़्यादा पहले न हो
  6. अगर कोई राजनीतिक दल आदेश का पालन नहीं कर रहा, तो चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट को इसकी जानकारी दें।
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