विदिशाः केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ये गेहूं की खरीदी की तीसरी समीक्षा थी। एक दिन रायसेन से मैंने की थी, एक दिन भोपाल से ही की थी और आज विदिशा में आके हमने पूरे संसदीय क्षेत्र के गेहूं खरीदी की विशेष रूप से आज समीक्षा की। एक तो मैं किसान भाइयों और बहनों को आश्वस्त करना चाहता हूं, मुख्यमंत्री जी ने भी आश्वस्त किया है, कि हर एक किसान से खरीदी होगी और अब खरीदी तेजी से चल रही है।

एक समस्या पहले आ रही थी स्लॉट बुकिंग की। उसमें देरी लग रही थी, धीमा चल रहा था सिस्टम। लेकिन हमने अब किसानों से भी बात की, समीक्षा की, तो तेजी से स्लॉट बुक करने का काम चल रहा है और अब स्लॉट बुकिंग में कोई समस्या बची नहीं है। लेकिन आपकी जानकारी में और आपके माध्यम से मैं किसान भाइयों-बहनों से कहना चाहता हूं कि अभी भी स्लॉट बुकिंग 23 तारीख तक हो सकता है, 23 मई तक। हालांकि जाएगा नहीं क्योंकि मैक्सिमम स्लॉट बुक हो चुके हैं अब। अपवाद स्वरूप बचे होंगे, तो मेरा विश्वास है कि दो-तीन दिन में सारे किसानों के स्लॉट बुक हो जाएंगे।
दूसरी चीज थी कि जिनने कौली या लीज पर ली है (जो अपन कहते हैं अपने यहां कौली कहते हैं, वैसे टेनेंट किसान कहते हैं) जो खुद की जमीन नहीं है लेकिन दूसरे से लेकर खेती करते हैं। तो उनकी भी कोई समस्या नहीं है। जिसका भूमि स्वामित्व है, जो मालिक है जमीन का, वो अगर कह देता है कि मैंने इनको जमीन बेची है, तो उनका उत्पाद भी ‘कौली जमीन मैंने बेची’ तो वो उत्पाद भी खरीदा जा रहा है। एक समस्या ये आ रही थी पहले कि स्लॉट में सत्यापित नहीं हो रहा है कि गेहूं है कि नहीं। कुछ और लिख के आ जाता था पहले। लेकिन अब उस समस्या का समाधान भी हो गया है। कहीं इक्का-दुक्का मामले आते हैं तो उसके लिए भी हमने यहां फैसला किया है कि कंट्रोल रूम कलेक्ट्रेट में रहेगा। अगर किसी किसान को ये समस्या आ रही है कि सत्यापित नहीं हो रहा, तो वो यहां पर जानकारी दे दे। तो वो सही किसान है तो सत्यापित करके उसकी समस्या का समाधान कर दिया जाएगा।
एक थी पहले बारदानों की कमी की समस्या। लेकिन आज पूरी समीक्षा में ये आया है कि बारदाने अब निरंतर आ रहे हैं। और अगले तीन दिन तक की खरीद के लिए बारदाने पर्याप्त हैं। और उनकी आपूर्ति लगातार हो रही है। कुछ जगह चूंकि सरकार ने भारी उत्पादन को देखते हुए पुराने बारदाने भी मैनेज किए थे, अब अगर वो बारदाने काम के हैं तो उनको उपयोग में लेंगे, नहीं तो उनकी जगह दूसरे भी रिप्लेस करने का काम लगातार हो रहा है। फिर तौल कांटे कहीं कम थे, उस तरह की समस्या थी। पहले तो आपको पता है कि 1000 क्विंटल ही खरीदी हो सकती थी एक खरीद केंद्र पे। अब वो बढ़ के 2250 क्विंटल हो गई है। और उसके हिसाब से जहां-जहां कांटों को बढ़ाने की भी आवश्यकता थी, वहां कांटे भी बढ़ाए जा रहे हैं ताकि जल्दी खरीदी का काम संपन्न हो सके।
अब तक जो आज समीक्षा की है, जैसे विदिशा जिले में ही जिन किसानों ने पंजीकरण करवाया था (पंजीकृत किसान), उनकी संख्या 87,913 थी। उनमें से स्लॉट बुक हो गए 72,027 के। कई बार जितना पंजीयन करवाते हैं उतना सब स्लॉट बुक नहीं करवाते, ये हमेशा से होता आया है, कुछ कम ही होते हैं। लेकिन फिर भी 82% (अगर इस हिसाब से भी देखें) तो किसानों के स्लॉट बुक हो चुके हैं और स्लॉट बुकिंग लगातार चल रही है, जारी है। अब तक जिन किसानों ने अपना गेहूं बेचा है (विक्रेता कृषक), उनकी संख्या 36,442 है और उनसे 1,99,563 मीट्रिक टन कुल 174 केंद्रों से अभी तक गेहूं खरीदा जा चुका है।
रायसेन जिले का अगर हम देखें, तो 77,117 किसानों ने पंजीकरण करवाया था। उनमें से 68,639 किसानों के स्लॉट बुक हो चुके हैं और उनमें से 32,374 किसान अपना गेहूं बेच चुके हैं और 1,80,199 मीट्रिक टन खरीदी हो चुकी है।