नई दिल्ली : राज्यसभा में विपक्षी पार्टियों के कोरोना से मौत के सवाल पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि बिना जानकारी के टिप्पणी करना बुरा है लेकिन जब जानबूझकर एक झूठी कहानी तैयार करने की कोशिश की जाती है तो यह और भी गंभीर मसला हो जाता है। किसी भी भारतीय नागरिक की मृत्यु खेद का विषय है, फिर चाहे उसकी मौत कोविड से हुई हो या किसी और कारण से।
पुरी ने कहा कि, ‘नागरिक उड्डयन मंत्री के तौर पर मैं पहला व्यक्ति था जिसने चीन से आने वाली उड़ानों पर रोक लगाई थी। हम 25 मार्च 2020 को पूर्ण लॉकडाउन में गए। एक ओर हमें बताया गया था कि लॉकडाउन बहुत गंभीर है और उसी वक्त आप केक भी चाहते हैं और उसे खाना भी चाहते हैं।’
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, हमने एक इकोसिस्टम तैयार किया। आज हम (टीकों के) सबसे प्रमुख उत्पादकों में से एक हैं। हम टीकों को लेकर अपनी घरेलू मांग को पूरा करने जा रहे हैं। कल (सोमवार) तक की बात करें तो, हम अब तक देशभर में कोरोना वायरस रोधी टीकों की 42 करोड़ खुराकें लगा चुके हैं।
वहीं, राज्य मंत्री स्वास्थ्य भारती प्रवीण पवार ने राज्यसभा को बताया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर से कोरोना से होने वाली मौतों के आंकड़े को छिपाने की कोई रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हांलांकि, कुछ राज्यों ने मृत्यु दर के आंकड़ों के मिलान के आधार पर अपने आंकड़ों को संशोधित जरूर किया है।’
बता दें कि इससे पहले शिवसेना सांसद संजय राउत ने राज्यसभा में सवाल उठाया था कि सरकार डाटा क्यों छिपा रही है? उन्होंने कहा था, ‘बताइए, कितने लोगों की जान गई है (कोविड-19 के चलते)। कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि कोरोना से मरने वाले लोगों की असल संख्या सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से कहीं अधिक है।’
वहीं, सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कोरोना वायरस महामारी को लेकर कहा, ‘इतने बड़े देश में कोरोना महामारी से कितने लोग मरे क्या ये रहस्य ही बना रहेगा? सरकार देश में कोरोना से 4 लाख से अधिक मौतों की बात बताती है। जो झूठे आंकड़े सरकार जारी कर रही है, वो सत्य से दूर हैं।’