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खनिज क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी, 2030-31 तक ₹30 हजार करोड़ राजस्व का लक्ष्य

मध्यप्रदेश सरकार प्रस्तावित खनिज अन्वेषण नीति-2026 के जरिए खनिज क्षेत्र में निवेश, राजस्व और रोजगार बढ़ाने पर जोर दे रही है। 2030-31 तक खनिज राजस्व को ₹30,000 करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य है। वहीं, DMF निधि के प्रभावी उपयोग से सिंगरौली को शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में मॉडल जिला बनाने की योजना है।

By: Nivedita 
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खनिज क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी, 2030-31 तक ₹30 हजार करोड़ राजस्व का लक्ष्य

भोपाल:  मध्यप्रदेश सरकार खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग, निवेश को बढ़ावा देने और खनिज क्षेत्र से राज्य की आय बढ़ाने की दिशा में नई रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में खनिज साधन विभाग की बैठक में विभाग की मौजूदा गतिविधियों के साथ प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति-2026 की विस्तृत समीक्षा की।

निवेश-अनुकूल होगी खनिज अन्वेषण नीति

बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति को मंजूरी देते हुए इसे अधिक प्रभावी, पारदर्शी और निवेश के लिए अनुकूल बनाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि खनिज संसाधनों के दोहन की प्रक्रिया वैज्ञानिक मानकों और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ाई जाए। सरकार का उद्देश्य है कि खनिज संपदा का जिम्मेदार तरीके से उपयोग हो, जिससे राज्य को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो और खनन एवं इससे जुड़े क्षेत्रों में निजी निवेश के नए अवसर विकसित हों।

स्थानीय लोगों के लिए रोजगार पर भी जोर

खनिज संसाधनों के विकास का लाभ केवल सरकारी राजस्व तक सीमित न रहे, बल्कि इसका सीधा फायदा स्थानीय समुदायों को भी मिले—इस दिशा में नीति को तैयार किया जा रहा है। खनन गतिविधियों के विस्तार के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का जोर खनिज क्षेत्र में ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर है, जिसमें आर्थिक विकास के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय हितों का भी संतुलन बना रहे।

2030-31 तक ₹30,000 करोड़ खनिज राजस्व का लक्ष्य

प्रस्तावित खनिज अन्वेषण नीति के तहत मध्यप्रदेश ने खनिज राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि का लक्ष्य निर्धारित किया है। वित्त वर्ष 2026-27 में ₹13,720 करोड़ का राजस्व हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद इसे बढ़ाकर वित्त वर्ष 2030-31 तक ₹30,000 करोड़ तक पहुंचाने की योजना है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए खनिज अन्वेषण को बढ़ावा देने, उपलब्ध संसाधनों का वैज्ञानिक आकलन करने और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने पर जोर दिया जाएगा।

 

DMF से सिंगरौली को मॉडल डिस्ट्रिक्ट बनाने की योजना

बैठक में जिला खनिज निधि (DMF) के प्रभावी इस्तेमाल पर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने खनिज संपदा से समृद्ध सिंगरौली जिले को DMF के माध्यम से विकास के विभिन्न क्षेत्रों में मॉडल जिला बनाने के निर्देश दिए। इसके तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, कृषि, वन एवं पर्यावरण संरक्षण, सड़क निर्माण और वाटरशेड विकास जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध निधि का बेहतर उपयोग किया जाएगा।

55 जिलों में ₹3,574.53 करोड़ की DMF राशि उपलब्ध

सरकार के अनुसार, जुलाई 2026 तक मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में कुल ₹3,574.53 करोड़ की जिला खनिज निधि उपलब्ध है। इसमें सबसे बड़ा योगदान खनिज संपदा से समृद्ध सिंगरौली जिले का बताया गया है। DMF राशि का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को गति देना है। सरकार चाहती है कि इस राशि का इस्तेमाल स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अधिक प्रभावी ढंग से किया जाए।

पर्यावरण संरक्षण के साथ खनिज विकास

नई नीति में खनिज संसाधनों के इस्तेमाल के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है। वैज्ञानिक और पारदर्शी प्रक्रियाओं के जरिए खनिज अन्वेषण एवं उपयोग को बढ़ावा देने का प्रयास होगा, ताकि प्राकृतिक संसाधनों का दीर्घकालिक संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके।

खनिज संपदा का लाभ जनहित तक पहुंचाने पर फोकस

मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य खनिज क्षेत्र को राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधारों में और मजबूत करना है। सरकार के अनुसार, खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व का अधिकतम लाभ प्रदेश के विकास और आम लोगों के कल्याण में लगाया जाना चाहिए। नई खनिज अन्वेषण नीति-2026 के जरिए मध्यप्रदेश में निवेश, रोजगार, राजस्व वृद्धि और संतुलित विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। सरकार की दीर्घकालिक रणनीति राज्य को देश के प्रमुख खनिज उत्पादक एवं निवेश-अनुकूल राज्यों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित करने की है।

 

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