नई दिल्ली : पिछले कई महीनों से लापता मुंबई के पूर्व कमिश्नर परमबीर सिंह ने अपनी जान की सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उनसे उनका ठिकाना पूछा है। कोर्ट ने कहा कि, जब तक हम यह नहीं जान लेते हैं कि आप कहां हो, तब तक सुरक्षा नहीं देंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने सिंह से अपने ठिकाने का खुलासा करने के लिए कहा है।
आपको बता दें कि परम बीर सिंह बीते कुछ समय से अंडरग्राउंड हैं। उनका पता ना तो पुलिस के पास है और ना ही कोर्ट के पास और ना ही जांच कर रही एजेंसियों के पास। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह से अपने स्थान का खुलासा करने के लिए कहा और कहा कि, “कोई सुरक्षा नहीं, कोई सुनवाई नहीं जब तक हम नहीं जानते कि आप कहां हैं”। शीर्ष अदालत ने उनके वकील को सिंह के ठिकाने के बारे में सूचित करने के लिए कहा और मामले की सुनवाई 22 नवंबर की तारीख तय की।
Supreme Court asks absconding former Mumbai police commissioner Param Bir Singh to disclose his whereabouts and says that it will hear Singh’s plea for protection against arrest only after he tells which part of the country or the world he is in. pic.twitter.com/LXNVfN3d7G
— ANI (@ANI) November 18, 2021
न्यायमूर्ति एस के कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस बात पर आपत्ति जताई कि सुरक्षा की मांग करने वाली उनकी याचिका पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए दायर की गई है। कोर्ट ने कहा, “आप सुरक्षात्मक आदेश मांग रहे हैं। कोई नहीं जानता कि आप कहां हैं। मान लीजिए कि आप विदेश में बैठे हैं और पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से कानूनी सहारा ले रहे हैं तो क्या होगा। अगर ऐसा है तो यदि अदालत आपके पक्ष में फैसला करती है, तो आप भारत आएंगे। हमें नहीं पता कि आपके मन में क्या चल रहा है।”
अदालत ने आगे कहा कि, “याचिका पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से दायर की गई है। आप कहां हैं? आप इस देश में हैं या बाहर हैं? हम बाकी बातों पर आएंगे, लेकिन पहले हम यह जानना चाहते हैं कि आप कहां हैं?”
आपको बता दें कि बॉम्बे में एक मजिस्ट्रेट की अदालत ने बुधवार को परम बीर सिंह और शहर के कुछ अन्य पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज जबरन वसूली के मामले में सिंह को “घोषित अपराधी” घोषित किया। उन्हें आखिरी बार इस साल मई में अपने कार्यालय में देखा गया था, जिसके बाद वह छुट्टी पर चले गए थे। राज्य की पुलिस ने पिछले महीने बॉम्बे हाईकोर्ट को बताया था कि उनके ठिकाने का पता नहीं है।