{ तबरेज़ कज़िलबाश की रिपोर्ट }
लॉक डाउन के चलते जहाँ ग़रीब और दिहाड़ी मज़दूरों के आगे कमाने और खाने की मुश्किलें खड़ी हो गई है वहीं प्रशासन के साथ कई निजी संस्थाए भी गरीबों तक खाना पहुचाने की मदद में लगी हुई है।
ऐसे में लखनऊ का मशहूर शिरोज़ कैफे और यहाँ काम करने वाली तेज़ाब अटैक का दंश झेल रही महिलाएं दुसरो की मदद के लिए आगे आई है जिनकी सोशल मीडिया पर जमकर सरहाना हो रही है।
एसिड अटैक सर्वाइवर्स द्वारा चलाया जा रहा गोमतीनगर का शीरोज़ कैफे आम दिनों में जहाँ लोगों से गुलज़ार रहता था वहीं लॉक डाउन के चलते यह बन्द पड़ा हुआ है और यहाँ काम करने वाली कई एसिड अटैक सर्वाइवर्स घर जा चुकी है।
लेकिन एसिड अटैक विक्टिम रजनीता, रुपाली और जया वक्त रहते घर नही जा पाई। इन्होंने अब अपने आसपास रह रहे गरीबों की मदद करने और उनको दिन में दो वक्त का खाना मोहय्या कराने का ज़िम्मा उठाया है।
शीरोज़ कैफे चलाने वाली यह महिलाएं कभी खाना पकाकर तो कभी राशन और अन्य खाद्य सामग्री के ज़रिए गरीब तबके के बच्चों और बड़ो तक चीज़े पहुँचा रही है जिसके चलते सोशल मीडिया पर भी इन एसिड अटैक सर्वाइवर्स की खूब प्रशंसा हो रही है।