नई दिल्ली : किसान आंदोलन की आड़ में एक बार फिर खालिस्तानी आतंकी संगठन के मुखिया गुरपतवंत सिंह पन्नू ने सोशल मीडिया के जरिए किसानों को भड़काने की साजिश रची है। उन्होंने पंजाब, कश्मीर, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र का भारत से अलग होना ही कृषि कानूनों को रद्द करवाने का एकमात्र उपाय बताया। सूत्रों की मानें तो, पन्नू इस बार स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लालकिले पर झंडा फहराने से रोकने की साजिश रच रहे हैं।
खालिस्तानी आतंकी संगठन के चीफ पन्नू ने सोशल मीडिया के जरिए हजारों की संख्या में ट्रैक्टर दिल्ली में लाकर परेड करने का आह्वान किया। खालिस्तानी गैंग की साजिश के निशाने पर इससे पहले देश का गणतंत्र दिवस था और अब स्वतंत्रता दिवस के दिन हंगामा करने की रणनीति बनाई जा रही है। प्रदर्शनकारी किसानों को भारत सरकार के खिलाफ उकसाया जा रहा है।

देश के खिलाफ बयानबाजी कर रहा खालिस्तानी गैंग
आपको बता दें कि पन्नू शुरुआत से ही किसान आंदोलन की आड़ में देश के खिलाफ बयान देते रहे हैं। उन्होंने इससे पहले गणतंत्र दिवस के मौके पर कहा था कि, “26 जनवरी आ रही है और लाल किले पर भारतीय तिरंगा है। 26 जनवरी को तिरंगे को हटाकर इसे खालिस्तानी झंडे से बदल दो।” इसके साथ ही खालिस्तानी संगठन किसान प्रदर्शन को लगातार 1984 सिख विरोधी हिंसा से जोड़कर सिखों को उकसाने की कोशिश कर रहा है।
शुरुआत से ही किसान आंदोलन के साथ जोड़ा जा रहा खालिस्तान का नाम
नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। इस आंदोलन के शुरू होते के साथ ही कई लोगों और संगठनों ने आरोप लगाया था कि किसान आंदोलन के बीच खालिस्तान विचाराधारा से जुड़े कई ग्रुप एक्टिव हो गए हैं, जो कि किसान आंदोलन की आड़ में फिर से खालिस्तान से जुड़ी मांगों को उठाना चाह रहे हैं। ऐसे में सभी लोगों को ये जानना जरूरी है कि आखिर ये खालिस्तान क्या है, जिसे लेकर इतने सवाल उठाए जा रहे हैं।
कब शुरू हुआ था ‘खालिस्तान आंदोलन’
साल 1947 में जब अंग्रेज भारत को दो देशों में बांटने की योजना बना रहे थे। तब कुछ सिख नेताओं को लगा कि अपने लिए अलग देश की मांग का ये सही समय है। इसी कड़ी में उन्होंने भी अपने लिए अलग देश (खालिस्तान) की मांग की। आजादी के बाद इसे लेकर हिंसक आंदोलन भी चला, जिसमें कई लोगों की जान गई थी। पंजाबी भाषी लोगों के लिए एक अलग राज्य की मांग की शुरुआत ‘पंजाबी सूबा’ आंदोलन से हुई थी।