नई दिल्ली : जम्मू-कश्मीर में पिछले 24 घंटे में मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हासिल हुई है। जिसमें उन्होंने तीन आतंकियों को मार गिराया है। कुलगाम में 2 जबकि श्रीनगर में एक आतंकी मार गिराया गया है। आपको बता दें कि कुलगाम में एनकाउंटर का आज दूसरा दिन है। कुलगाम में मारे गए आतंकी की पहचान हिजबुल कमांडर शिराज मौलवी और यावर भट्ट के तौर पर हुई है।
बता दें कि शिराज युवाओं को बरगलाकर आतंकी बनाने के काम में जुटा हुआ था। साथ ही, निर्दोष लोगों की हत्या में भी वह शामिल था। तो वहीं, श्रीनगर में मारे गए आतंकी की पहचान पुलवामा के आमिर रियाज के तौर पर हुई है। मारा गया आमिर रियाज आतंकी संगठन गजवातुल हिंद से जुड़ा हुआ था। जम्मू कश्मीर पुलिस के मुताबिक, आतंकी आमिर रियाज को फिदायीन हमले की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
बता दें कि इससे पहले, जम्मू कश्मीर में श्रीनगर और कुलगाम जिलों में गुरुवार को सुरक्षा बलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में दो आतंकवादी मारे गए। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि यहां बेमिना इलाके के हमदानिया कॉलोनी इलाके में शाम को मुठभेड़ शुरू हो गयी। कश्मीर मंडल पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल पर बताया कि मुठभेड़ में एक अज्ञात आतंकवादी मारा गया है। कुछ गोला बारुद के साथ एक एके राइफल भी बरामद की गयी है जबकि तलाश अभियान अभी चल रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि अंतिम रिपोर्ट मिलने तक मुठभेड़ चल रही थी। उन्होंने बताया कि, ‘‘सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) शिविर और उपमंडलीय पुलिस अधिकारी के कार्यालय के समीप अभियान चल रहा है।’’ इस बीच, मुजाहिदीन गजवातुल हिंद ने एक ‘‘हमले’’ की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उसके तीन कैडर ने ‘‘सीआरपीएफ शिविर पर हमला’’ किया है।
बता दें कि इससे पहले दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में मुठभेड़ शुरू हो गयी थी। अधिकारियों ने बताया कि दक्षिण कश्मीर में कुलगाम के चावलगाम इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिलने पर कार्रवाई करते हुए सुरक्षा बलों ने वहां घेराबंदी की तथा तलाश अभियान शुरू किया।
उन्होंने बताया कि जब सुरक्षा बल इलाके में तलाशी ले रहे थे, तब आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी की। उन्होंने बताया कि सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। उन्होंने बताया कि इस दौरान एक आतकंवादी मारा गया जिसकी पहचान की जा रही है। उन्होंने कहा कि अभी आतंकवादी की पहचान नहीं की जा सकी है और न ही यह पता चला है कि वह किस समूह से जुड़ा हुआ था।