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जीतू पटवारी ने कृषि व्यवस्था को लेकर सरकार पर साधा निशाना

मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शहडोल में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के खुले में खराब होने और सीहोर में वेयरहाउस सब्सिडी से जुड़ी रिश्वत की शिकायत को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने धान के भंडारण, उठाव और मिलिंग की व्यवस्था के साथ कृषि सब्सिडी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।

By: Nivedita 
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जीतू पटवारी ने कृषि व्यवस्था को लेकर सरकार पर साधा निशाना

भोपाल। मध्यप्रदेश में किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े दो मामलों को लेकर कांग्रेस ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शहडोल में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान के खुले में पड़े होने और सीहोर में वेयरहाउस सब्सिडी से जुड़े रिश्वत के आरोपों को लेकर सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।

शहडोल में धान के रखरखाव को लेकर सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष के मुताबिक, शहडोल में वर्ष 2025-26 के दौरान समर्थन मूल्य पर खरीदा गया करीब 9.44 लाख क्विंटल धान खुले में रखा हुआ है। इसकी अनुमानित कीमत 222 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। बारिश के कारण धान के भीगने और अंकुरित होने की स्थिति सामने आने का दावा किया गया है। पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि धान का समय पर परिवहन, भंडारण और मिलिंग नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी। उन्होंने खराब हुए अनाज से संभावित सरकारी नुकसान की भरपाई को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

सीहोर में सब्सिडी को लेकर रिश्वत का आरोप

कांग्रेस ने सीहोर के एक मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें वेयरहाउस सब्सिडी जारी करने के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आने की बात कही गई है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शिकायत के बाद केंद्रीय कृषि मंत्रालय से जुड़े एक विपणन अधिकारी को निलंबित किए जाने की जानकारी दी गई है। शिकायत में भैरुंदा क्षेत्र के एक वेयरहाउस से एक लाख रुपये और रेहटी क्षेत्र के दूसरे वेयरहाउस से 60 हजार रुपये मांगने का आरोप बताया गया है। इन आरोपों की अंतिम स्थिति संबंधित जांच के निष्कर्ष से स्पष्ट होगी।

 

सरकार से कई सवालों के जवाब मांगे

जीतू पटवारी ने सरकार से पूछा कि शहडोल में करोड़ों रुपये का धान खुले में क्यों पड़ा रहा और उसके समय पर उठाव व मिलिंग की जिम्मेदारी किसकी थी। उन्होंने बारिश से खराब हुए धान से होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान और उसकी जिम्मेदारी तय करने की मांग भी की। इसके अलावा उन्होंने कृषि एवं वेयरहाउस से जुड़ी सब्सिडी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और किसानों व कृषि उद्यमियों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।

कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग की

पटवारी ने कहा कि कृषि क्षेत्र से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की अनियमितता या भ्रष्टाचार की शिकायत की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच में आरोप सही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि किसानों की फसल, आय और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों को आगे भी उठाया जाएगा। वहीं, इन आरोपों और सवालों पर सरकार या संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

 

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