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जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र, बोले- नई इन्वेस्टर्स समिट नहीं, पिछली समिट का हिसाब दे सरकार

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में घोषित ₹30.77 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों का हिसाब मांगा है। उन्होंने निवेश और प्रचार पर खर्च हुए करीब ₹230 करोड़ का विवरण सार्वजनिक करने, निवेश की स्थिति पर श्वेतपत्र जारी करने और युवाओं को मिले रोजगार का आंकड़ा बताने की मांग की है।

By: Nivedita 
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जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र, बोले- नई इन्वेस्टर्स समिट नहीं, पिछली समिट का हिसाब दे सरकार

भोपाल:  मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर प्रदेश में निवेश के नाम पर किए गए खर्च और निवेश प्रस्तावों की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को अब एक और इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन नहीं, बल्कि पिछली समिट में किए गए वादों और खर्च का पूरा हिसाब चाहिए।

₹30.77 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर उठाए सवाल

जीतू पटवारी ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के मंच से मध्य प्रदेश में ₹30.77 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आने की घोषणा की थी। सरकार ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए खूब प्रचार किया, लेकिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े किए हैं। पत्र के मुताबिक, मार्च 2024 से नवंबर 2025 के बीच निवेश आकर्षित करने और उसके प्रचार-प्रसार पर करीब ₹230 करोड़ खर्च किए गए। इसमें निवेश सम्मेलन पर ₹186.64 करोड़, मुख्यमंत्री की तीन विदेश यात्राओं पर लगभग ₹34 करोड़ और विभिन्न शहरों में आयोजित रोड शो पर करीब ₹9.05 करोड़ खर्च होने का उल्लेख किया गया है।

 

जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र, बोले- नई इन्वेस्टर्स समिट नहीं, पिछली समिट का हिसाब दे सरकार

जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र, बोले- नई इन्वेस्टर्स समिट नहीं, पिछली समिट का हिसाब दे सरकार

भोपाल इन्वेस्टर्स समिट के खर्च पर भी सवाल

पटवारी ने पत्र में भोपाल में आयोजित दो दिवसीय इन्वेस्टर्स समिट पर करीब ₹82 करोड़ खर्च होने का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि इतने बड़े पैमाने पर सरकारी धन खर्च करने के बाद निवेश प्रस्तावों की सूची में सामने आए नामों और दावों की वास्तविक स्थिति क्या है? उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या निवेश प्रस्तावों की स्वतंत्र जांच किए बिना ही करोड़ों रुपये के आंकड़ों को उपलब्धि के रूप में पेश कर दिया गया?

मुख्यमंत्री से पूछे पांच सीधे सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने पांच प्रमुख सवाल रखे हैं।

1. ₹30.77 लाख करोड़ के निवेश प्रस्तावों में से अब तक वास्तव में कितना निवेश मध्य प्रदेश में आया है? कितनी परियोजनाएं जमीन पर उतरीं और कितने उद्योगों में उत्पादन शुरू हुआ?

2. निवेश प्रस्तावों की सूची में शामिल संदिग्ध नामों और असंगत वित्तीय दावों की जांच से पहले किस स्तर पर सत्यापन किया गया? इसके लिए कौन अधिकारी जिम्मेदार था?

3. करीब ₹230 करोड़ के सरकारी खर्च के बदले प्रदेश को कितने नए उद्योग, परियोजनाएं और वास्तविक रोजगार मिले?

4. मुख्यमंत्री की विदेश यात्राओं और देशभर में आयोजित रोड शो के बाद कितने निवेशक वास्तव में मध्य प्रदेश पहुंचे और कितनी परियोजनाओं में पूंजी निवेश हुआ?

5. निवेश के नाम पर रोजगार देने की घोषणाओं में से कितने युवाओं को वास्तव में स्थायी नौकरियां मिलीं?

 

 

निवेश के प्रचार से ज्यादा जरूरी जमीन पर उद्योग : पटवारी

जीतू पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को इन्वेस्टर्स समिट के भव्य मंच और विज्ञापनों से नहीं, बल्कि जमीन पर स्थापित होने वाले उद्योगों से मजबूती मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार निवेश के आंकड़ों का प्रचार कर सकती है, लेकिन विकास का वास्तविक प्रमाण प्रदेश की जनता को देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के युवाओं को निवेश के बड़े-बड़े आंकड़े नहीं, बल्कि रोजगार चाहिए। सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि निवेश के नाम पर घोषित रोजगार में से कितने युवाओं को स्थायी नौकरी मिली है।

कांग्रेस ने सरकार से श्वेतपत्र जारी करने की मांग की

अपने पत्र के माध्यम से जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से मांग की कि ₹30.77 लाख करोड़ के निवेश दावों पर सरकार तत्काल श्वेतपत्र जारी करे। साथ ही सभी निवेश प्रस्तावों, निवेशकों की पहचान, उनकी वित्तीय क्षमता और परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने निवेश प्रस्तावों को वास्तविक निवेश, शुरू हो चुकी परियोजनाओं और रोजगार के प्रमाणित आंकड़ों के साथ सार्वजनिक करने की मांग की। इसके अलावा इन्वेस्टर्स समिट, विदेश यात्राओं, रोड शो और प्रचार पर हुए करीब ₹230 करोड़ के खर्च का मदवार विवरण देने की बात भी कही। पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि निवेश प्रस्तावों के सत्यापन में लापरवाही या सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। पत्र के अंत में उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता को एक और इन्वेस्टर्स समिट नहीं, बल्कि पिछली इन्वेस्टर्स समिट का पूरा हिसाब चाहिए।

 

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