Madhya Pradesh News: मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर सफाई कर्मचारियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। जिसमें उन्होंने कहा कि प्रदेश में करीब 2 लाख सफाई कर्मचारी शहरों और गांवों को स्वच्छ रखने का काम करते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं और अधिकारों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। महंगाई के इस दौर में महज 9 हजार रुपये वेतन में परिवार चलाना मुश्किल है। उन्होंने सरकार से सफाई कर्मचारियों के लिए ठोस नीति बनाने की मांग की है।
भोपाल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उमंग सिंघार ने कहा कि दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों में सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जिसमें कई जगह कचरा गाड़ियां नहीं चल पा रही हैं। इसके बावजूद सरकार सफाई कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है। साथ ही, उन्होंने कहा कि वाल्मीकि समाज के लोग पूरे प्रदेश को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें उचित वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
उमंग सिंघार ने सीवर और ड्रेनेज लाइन की सफाई के दौरान कर्मचारियों की मौत के मामलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पांच अलग-अलग घटनाओं में आठ सफाई कर्मचारियों की मौत हुई, जबकि चार लोग घायल हुए हैं। ग्वालियर, रीवा, सतना, इंदौर और उज्जैन में हुए हादसों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए सरकार ने अब तक स्पष्ट नीति नहीं बनाई है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार सीवर सफाई के दौरान मौत होने पर पीड़ित परिवार को 30 लाख रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए। लेकिन प्रदेश में कई मामलों में केवल 2 से 4 लाख रुपये ही दिए जा रहे हैं। उन्होंने मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट 2013 के तहत कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण और बेहतर कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराने की मांग की।
उमंग सिंघार ने कहा कि लंबे समय से काम कर रहे सफाई कर्मचारियों को नियमित किया जाना चाहिए। उन्होंने आउटसोर्स भर्ती में 40 हजार से एक लाख रुपये तक कमीशन वसूले जाने का आरोप भी लगाया। साथ ही कहा कि इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाएगा। उन्होंने सरकार से ठेका प्रथा और आउटसोर्स व्यवस्था बंद करने, सीवर हादसों में जान गंवाने वाले कर्मचारियों के परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने और 10 साल से अधिक समय से काम कर रहे कर्मचारियों को नियमित करने की मांग की है।
उमंग सिंघार ने कहा कि 9 हजार रुपये में बच्चों की पढ़ाई, राशन और मकान का किराया निकालना बेहद मुश्किल है। सरकार को सफाई कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों के बिना शहरों की स्वच्छता और त्योहारों की खुशियां अधूरी हैं। ऐसे में अब देखना होगा कि विपक्ष के आरोपों और मांगों पर मध्यप्रदेश सरकार क्या कदम उठाती है।
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