भोपाल। जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा राजधानी भोपाल के एमपी नगर स्थित एकलव्य संकुल में प्रेस वार्ता आयोजित कर जनजातीय समाज के अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान दिल्ली के लालकिला मैदान में 24 मई को आयोजित ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ की सफलता और उसमें लिए गए संकल्पों की जानकारी भी साझा की गई।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जनजाति सुरक्षा मंच के प्रांत सदस्य प्रकाश उइके ने बताया कि दिल्ली में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में देशभर से बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज की सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाना था।

उन्होंने कहा कि समागम में जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ-साथ सामाजिक न्याय, शिक्षा, रोजगार और जनजातीय हितों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी व्यापक चर्चा की गई। विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने अपने अनुभव साझा किए और समाज के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।
प्रकाश उइके ने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच लगातार जनजातीय समाज की सांस्कृतिक अस्मिता को मजबूत करने और पारंपरिक आस्थाओं की रक्षा के लिए कार्य कर रहा है। मंच का प्रयास है कि समाज के लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाए और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सकारात्मक पहल की जाए।
प्रेस वार्ता के दौरान मंच के पदाधिकारियों ने आगामी कार्यक्रमों और जनजागरण अभियानों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि दिल्ली समागम में लिए गए संकल्पों को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए विभिन्न राज्यों में संवाद कार्यक्रम, जागरूकता अभियान और सामाजिक सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
मंच के प्रतिनिधियों ने कहा कि जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन आगे भी सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा। इसके लिए समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
प्रेस वार्ता में मंच के अन्य पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। सभी ने जनजातीय समाज के सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प दोहराया।