मध्यप्रदेश में मेट्रोपोलिटन विकास, आधुनिक सड़क अधोसंरचना और हाई-स्पीड कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं तैयार की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोपाल और उज्जैन–इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्रों की अधिसूचना प्रदेश के सुनियोजित शहरी एवं क्षेत्रीय विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों के शहरों, कस्बों, औद्योगिक क्षेत्रों, धार्मिक स्थलों और आर्थिक केंद्रों को बेहतर सड़क नेटवर्क से जोड़ना है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि भोपाल–विदिशा 4-लेन परियोजना को मंत्रि-परिषद की स्वीकृति के लिए प्रस्तावित किया गया है। करीब 1,757 करोड़ 55 लाख रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 44.83 किलोमीटर लंबे मौजूदा 2-लेन मार्ग को पेव्ड शोल्डर सहित 4-लेन किया जाएगा। मार्ग भोपाल के भानपुर टी-जंक्शन से शुरू होकर सूखी सेवनिया, दीवानगंज और सलामतपुर होते हुए सांची–सलामतपुर जंक्शन तक जाएगा। परियोजना में सूखी सेवनिया, बेरखेड़ी और सलामतपुर में कुल 8.25 किलोमीटर के तीन बायपास भी प्रस्तावित हैं।
उज्जैन–इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में भी सड़क नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है। इंदौर–उज्जैन 6-लेन मार्ग, इंदौर–उज्जैन ग्रीनफील्ड 4-लेन, उज्जैन–जावरा ग्रीनफील्ड मार्ग, उज्जैन–मक्सी 4-लेन, उज्जैन सिंहस्थ बायपास और हरिफाटक ब्रिज चौड़ीकरण जैसी परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इंदौर–उज्जैन 6-लेन परियोजना में करीब 80 प्रतिशत भौतिक प्रगति हो चुकी है। इन परियोजनाओं से उज्जैन को दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे और प्रमुख औद्योगिक एवं व्यापारिक कॉरिडोर से बेहतर संपर्क मिलेगा।
भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के लिए भोपाल वेस्टर्न बायपास, ईस्टर्न बायपास, भोपाल–इंदौर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और भोपाल–विदिशा 4-लेन जैसी परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं। इनसे शहर में भारी वाहनों का दबाव कम होगा और भविष्य में शहरी विस्तार के लिए बेहतर आधार तैयार होगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 29,693 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और उन्नयन किया गया है। हाइब्रिड एन्युटी मॉडल के तहत 18,166 करोड़ रुपये की लागत से 444 किलोमीटर लंबी सात प्रमुख परियोजनाओं पर काम जारी है, जबकि 26,890 करोड़ रुपये की नौ परियोजनाएं विभिन्न चरणों में हैं।
इसके अलावा प्रदेश में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे नेटवर्क विकसित करने की योजना है। पहले चरण में सागर–सतना, भोपाल–मंदसौर और जबलपुर–आशापुर एक्सप्रेसवे की डीपीआर तैयार की जा रही है। दूसरे चरण में सागर–जबलपुर, कटनी–सिंगरौली, भोपाल–जबलपुर और भोपाल–ग्वालियर एक्सप्रेसवे प्रस्तावित हैं।
सबसे बड़ी योजना 2026-27 से 2030-31 के रोड नेटवर्क मास्टर प्लान की है। इसके तहत 1,226 मार्गों की 29,682 किलोमीटर लंबाई के विकास और उन्नयन का लक्ष्य रखा गया है, जिसकी अनुमानित लागत 88,634 करोड़ रुपये है। पीएम गतिशक्ति पोर्टल और जीआईएस आधारित योजना के माध्यम से कनेक्टिविटी गैप और विकास क्षेत्रों की पहचान कर प्राथमिकता तय की जाएगी। सरकार का दावा है कि इन परियोजनाओं से यात्रा समय घटेगा, निवेश और रोजगार बढ़ेंगे तथा मध्यप्रदेश को मजबूत एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी वाला राज्य बनाने में मदद मिलेगी।