नई दिल्ली में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आयोजन किया गया। भारत मंडपम में हुए कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों और अभियंताओं को ग्रामीण सड़क परियोजनाओं में तेजी, गुणवत्ता और नवाचार पर विशेष ध्यान देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि चिंतन शिविर को महज औपचारिक बैठक तक सीमित न रखा जाए, बल्कि यहां से ऐसे व्यावहारिक समाधान निकलने चाहिए, जिनका सीधा असर गांवों में दिखाई दे।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश के विकास की मजबूत नींव गांवों से जुड़ी है। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ने ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन को आसान बनाने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनजीवन में भी बदलाव लाने का काम किया है। उन्होंने बताया कि देश में अब तक करीब 8.50 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण हो चुका है। वहीं पीएमजीएसवाई के चौथे चरण में 62 हजार किलोमीटर नई सड़कों का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें करीब 20 हजार किलोमीटर के लिए स्वीकृति दी जा चुकी है।
केंद्रीय मंत्री ने सड़क परियोजनाओं में अनावश्यक देरी को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने स्वीकृति से निर्माण शुरू होने तक निर्धारित 72 दिनों की समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने को कहा। टेंडर प्रक्रिया में बार-बार आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए पहले से बेहतर तैयारी करने पर भी जोर दिया गया। उनका कहना था कि बोली न आने या टेंडर निरस्त होने जैसी समस्याओं का समाधान प्री-टेंडर स्तर पर ही तलाशना चाहिए।
वन और पर्यावरण संबंधी मंजूरियों में होने वाली देरी को लेकर भी शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों से सक्रियता दिखाने को कहा। उन्होंने केवल पत्राचार तक सीमित रहने के बजाय संबंधित विभागों और जिला प्रशासन के साथ सीधे समन्वय कर लंबित मामलों का समाधान करने की बात कही। उनका जोर इस बात पर रहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण ग्रामीण सड़क परियोजनाएं लंबे समय तक अटकी न रहें।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां अलग हैं। ऐसे में हर क्षेत्र में एक जैसी इंजीनियरिंग व्यवस्था लागू नहीं की जा सकती। डीपीआर तैयार करते समय स्थानीय परिस्थितियों, ढलान, जल निकासी, पुलिया और जलभराव जैसे पहलुओं को ध्यान में रखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के साथ प्रभावी ड्रेनेज और जरूरी संरचनाओं की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि बारिश के दौरान आसपास के गांवों में जलभराव की समस्या न पैदा हो।
शिवराज सिंह चौहान ने पीएमजीएसवाई के तहत निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि घटिया काम करने वाली एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़ने पर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए।उन्होंने अधिकारियों से कार्यालयों तक सीमित रहने के बजाय मौके पर जाकर औचक निरीक्षण करने को कहा। निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति की निगरानी को परियोजनाओं की सफलता के लिए जरूरी बताया गया।
केंद्रीय मंत्री ने सड़क निर्माण और रखरखाव में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की सराहना की। गुणवत्ता के क्षेत्र में गुजरात, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और राजस्थान के काम का उल्लेख किया गया। वहीं रखरखाव के मामले में पंजाब, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु को बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल किया गया। नई तकनीक के इस्तेमाल में उत्तर प्रदेश और सड़क संपत्तियों की क्यूआर कोडिंग में असम के प्रयासों की भी सराहना की गई। उन्होंने कहा कि समय पर और अच्छी गुणवत्ता के साथ परियोजनाएं पूरी करने वाले राज्यों को भविष्य की परियोजनाओं में प्राथमिकता दी जाएगी।

शिवराज सिंह चौहान ने सड़क निर्माण के बाद उसके रखरखाव को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसी पर पांच वर्ष तक सड़क के रखरखाव की जिम्मेदारी रहती है। उन्होंने शुरुआती स्तर पर सड़क की छोटी-मोटी खराबियों की मरम्मत करने और लंबे समय के लिए लाइफ साइकिल मैनेजमेंट की व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया। पांच साल की अवधि के बाद भी सड़कों के रखरखाव के लिए राज्यों को स्थायी वित्तीय व्यवस्था तैयार करने का सुझाव दिया।
पीएम जनमन योजना के तहत दूरदराज और संवेदनशील क्षेत्रों में सड़क संपर्क बढ़ाने पर भी केंद्रीय मंत्री ने जोर दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र के गढ़चिरौली, झारखंड और आंध्र प्रदेश के प्रभावित एवं दुर्गम इलाकों में सड़क निर्माण को तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में बेहतर सड़क संपर्क केवल विकास का साधन नहीं, बल्कि लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएमजीएसवाई की सोच केवल सड़क बनाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसका उद्देश्य बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए ग्रामीण समुदायों के जीवन में स्थायी बदलाव लाना है। उन्होंने अधिकारियों और अभियंताओं से नए विचारों और व्यावहारिक सुझावों के साथ काम करने का आह्वान किया। उनके मुताबिक, योजनाओं की सफलता तभी मानी जाएगी जब उसका लाभ फील्ड में आम लोगों के जीवन में साफ दिखाई दे।