गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी जीत का दावा तेज कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने बीजेपी प्रत्याशी और मौजूदा एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में बड़ा बयान दिया। उन्होंने ध्रुव त्रिपाठी को मेहनती, ईमानदार और शिक्षकों के मुद्दों के लिए लगातार संघर्ष करने वाला नेता बताते हुए चुनाव में उनकी जीत को एकतरफा करार दिया।
स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि ध्रुव कुमार त्रिपाठी लंबे समय से शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाते रहे हैं। उनके मुताबिक शिक्षक समुदाय के बीच ध्रुव त्रिपाठी की छवि मेहनत और ईमानदारी की है। उन्होंने नामांकन कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षक कार्यक्रम में मौजूद रहे। स्वतंत्र देव सिंह ने इसे बीजेपी प्रत्याशी के प्रति समर्थन और उत्साह का संकेत बताते हुए दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आशीर्वाद भी ध्रुव त्रिपाठी के साथ है।
बीजेपी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हुए संजय त्रिपाठी को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वतंत्र देव सिंह ने बीजेपी की विचारधारा का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि बीजेपी में आने का उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना या सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए काम करना है। उन्होंने पार्टी के पुराने नेताओं से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक का उल्लेख करते हुए कहा कि बीजेपी की राजनीति गरीबों और जरूरतमंदों की सेवा पर केंद्रित है।
स्वतंत्र देव सिंह ने केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि गरीब परिवारों को आवास, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने आयुष्मान योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकार का प्रयास है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ जाति और राजनीतिक समर्थन के आधार पर नहीं, बल्कि पात्रता के आधार पर दिया जा रहा है।
जल शक्ति मंत्री ने सपा और बसपा पर निशाना साधते हुए दावा किया कि जनता इन दलों को लगातार नकार रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में शिक्षकों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई काम किए गए हैं। उन्होंने विद्यालयों के विकास के लिए अलंकार योजना, शिक्षकों एवं शिक्षामित्रों से जुड़े फैसलों और अन्य सरकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।
स्वतंत्र देव सिंह ने 5 से 9 अक्टूबर तक चल रहे सेवा सेतु अभियान को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सीधे जनता के बीच पहुंचाया जा रहा है। ब्लॉक स्तर पर चौपाल और नगर निकाय क्षेत्रों में शिविरों के माध्यम से लोगों की समस्याएं सुनी जा रही हैं। पेंशन, आयुष्मान कार्ड, राशन कार्ड और विभिन्न प्रमाण-पत्रों से संबंधित मामलों के समाधान की व्यवस्था किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
सेवा सेतु अभियान के तहत स्वास्थ्य शिविर लगाए जाने की भी जानकारी दी गई। इन शिविरों में लोगों की स्वास्थ्य जांच के साथ जरूरत के अनुसार दवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। मंत्री के मुताबिक, अभियान का उद्देश्य सरकारी तंत्र और आम जनता के बीच दूरी कम करना तथा लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराना है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समाज से जुड़े राजनीतिक सवाल पर स्वतंत्र देव सिंह ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल जातियों और समाज के विभिन्न वर्गों को लेकर विवादित बयान देते हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी का संगठन लगातार जनता के बीच काम करता है और उसका मुख्य फोकस गरीब कल्याण तथा विकास योजनाओं पर है।
स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि बीजेपी की नीति ‘सबका साथ, सबका विकास’ पर आधारित है। उन्होंने दावा किया कि सरकारी योजनाओं का लाभ केवल बीजेपी समर्थकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पात्रता रखने वाले हर जरूरतमंद परिवार तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति जनता का विश्वास मजबूत हुआ है।
राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी और एनडीए के संभावित उम्मीदवारों को लेकर पूछे गए सवाल पर स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि उम्मीदवारों का अंतिम फैसला पार्टी का संसदीय बोर्ड करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व ही लेगा।
ध्रुव कुमार त्रिपाठी के समर्थन में स्वतंत्र देव सिंह के बयान के बाद गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव और दिलचस्प हो गया है। बीजेपी जहां लगातार अपने प्रत्याशी की जीत का दावा कर रही है, वहीं चुनावी मैदान में अन्य दल और प्रत्याशी भी अपनी रणनीति के साथ सक्रिय हैं। अब परिणाम ही तय करेगा कि बीजेपी के नेताओं का दावा शिक्षक मतदाताओं के बीच कितना असर डालता है।