गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में बीजेपी प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी एक बार फिर मैदान में हैं। लगातार तीन बार शिक्षक विधायक रह चुके ध्रुव त्रिपाठी इस बार बीजेपी के टिकट पर चौथी जीत हासिल करने की कोशिश में जुटे हैं। उनका कहना है कि शिक्षकों से जुड़े मुद्दे और उनके हित उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर हैं।
चुनाव के दौरान जब ध्रुव कुमार त्रिपाठी से बीजेपी में शामिल होने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक फैसले के पीछे केवल एक पक्ष नहीं होता। उन्होंने स्वीकार किया कि पार्टी में शामिल होने के लिए उनकी ओर से भी पहल की गई थी। उनके मुताबिक, बीजेपी के साथ जुड़कर शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए काम करने का अवसर मिला है।

लगातार तीन चुनाव जीत चुके ध्रुव त्रिपाठी से जब पूछा गया कि शिक्षक हित में अभी क्या काम बाकी है, तो उन्होंने कहा कि शिक्षकों की समस्याएं समय के साथ बदलती रहती हैं। नई विसंगतियां और मांगें सामने आती रहती हैं, जिन्हें सरकार के सामने उठाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक समुदाय से जुड़े मुद्दों को सरकार के संज्ञान में लाकर उनके समाधान के लिए लगातार संवाद किया जाता रहा है।

समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी डॉ. संजयन त्रिपाठी के बारे में सवाल पूछे जाने पर ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने अपने काम और प्राथमिकताओं पर चर्चा को ज्यादा महत्वपूर्ण बताया। उनका संदेश साफ है कि चुनावी मुकाबले में वह व्यक्तिगत या प्रतिद्वंद्वी से जुड़े सवालों के बजाय अपने एजेंडे और शिक्षक हितों से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखना चाहते हैं।
चुनाव में पुरानी पेंशन व्यवस्था और वित्तविहीन शिक्षकों की समस्याएं भी प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। ध्रुव त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षकों की मांगों को सरकार के सामने रखा गया है और इन पर विचार करने का आश्वासन मिला है। उन्होंने सेवा नियमावली और मानदेय से जुड़े विषयों पर भी प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात कही। ऐसे में शिक्षक हित, पुरानी पेंशन, वित्तविहीन शिक्षकों की स्थिति और सेवा नियमावली जैसे मुद्दे इस चुनाव में चर्चा के केंद्र में बने हुए हैं।
तीन बार शिक्षक विधायक रह चुके ध्रुव कुमार त्रिपाठी के सामने अब चौथी बार जीत दर्ज करने की चुनौती है। बीजेपी के प्रत्याशी के तौर पर उनका चुनावी अभियान शिक्षक समुदाय से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित नजर आ रहा है। अब चुनाव परिणाम तय करेगा कि शिक्षक मतदाता उनके पुराने कार्यकाल और मौजूदा एजेंडे को कितना समर्थन देते हैं।