कीमतों में वृद्धि को लेकर भारतीय टेलीकॉम कंपनियां धर्म-संकट में फंसी हुई हैं. औसत रेवेन्यू प्रति यूजर (एआरपीयू) बढ़ाने के लिए कीमतों में वृद्धि करना आवश्यक है,भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया दोनों ही इससे कतरा रही हैं. उन्हें भरोसा नहीं कि उनकी देखा-देखी रिलायंस जियो भी कीमतें बढ़ाएगी.
कोटक इस्टीट्यूशनल इक्विटीज का मानना है कि मौजूदा दरों पर जियो और एयरटेल अपनी यथास्थिति जारी रख सकती हैं क्योंकि उनकी वित्तीय स्थिति वोडाफोन आइडिया से बेहतर है.
कोटक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा कि उनकी नजर में यथास्थिति बनाए रखना एयरटेल और जियो के लिए सकारात्मक है. ब्रोकरेज ने कहा, “जियो पर एआरपीयू बढ़ाने का कोई खास दबाव नही हैं, बशर्ते हालिया फंड जुटाने की प्रक्रिया में इसकी कोई बात न हो, जिसके बारे में अभी कोई जानकारी नहीं है.
जून तिमाही के अंत तक जियो का एआरपीयू 140.3 रुपये था, जबकि एयरटेल का 157 रुपये और वोडाफोन आइडिया का 114 रुपये का था. कोटक ने कहा कि एयरटेल पर कर्ज का दबाव नहीं है, मगर वोडाफोन को दरों में वृद्धि के बारे में जल्द से जल्द कोई फैसला लेना होगा.
न्यू स्ट्रीट रिसर्च के अनुसार, वोडाफोन को नवंबर या दिसंबर में दरों को कम से कम 20 फीसदी तक बढ़ाना होगा क्योंकि कंपनी को मार्च 2021 में एजीआर बकाये की पहली किस्त भेजनी है.
ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल के अनुसार, “अत्यधिक प्रतियोगिता के चलते निकट भविष्य में दरों में वृद्धि को लेकर अस्थिरता बनी रह सकती है, हमें भरोसा है कि इसमें देरी होने पर नियामकीय हस्तक्षेप हो सकता है.
ब्रोकरेज फर्म जेपी मॉर्गन के एक सर्वे के अनुसार, 88 फीसदी यूजर्स 10 फीसदी टैरिफ वृद्धि को वहन कर सकते हैं और बेहतर स्पीड व कंटेंट के लिए अधिक खर्च करने को भी तैयार हैं.