सत्ता में आने से पहले केंद्र की मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के राज्यों से उग्रवाद के खात्मे का वादा किया था और इस दिशा में सोमवार को सरकार के हाथ बड़ी सफलता लगी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में केंद्र सरकार, असम सरकार और बोडो उग्रवादियों के प्रतिनिधियों ने असम समझौता 2020 पर हस्ताक्षर कर लिया।
अमित शाह ने कहा कि, आज केंद्र, असम सरकार और बोडो प्रतिनिधियों ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता असम के लिए और बोडो लोगों के लिए एक सुनहरा भविष्य सुनिश्चित करेगा। एनडीएफबी के सभी गुटों के प्रतिनिधियों के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने को लेकर शाह ने कहा कि, 130 हथियारों के साथ 1550 कैडर 30 जनवरी को आत्मसमर्पण करेंगे। गृह मंत्री के तौर पर मैं सभी प्रतिनिधियों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि सभी वादे समयबद्ध तरीके से पूरे होंगे।
असम के मंत्री हिमंत बिस्व शर्मा ने कहा कि, बोडो समाज के सभी हितधारकों ने असम की क्षेत्रीय अखंडता की पुष्टि करते हुए इस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
तकरीबन 50 साल पहले असम के बोडो बहुल इलाकों में अलग राज्य बनाए जाने को लेकर हिंसात्मक विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व एनडीएफबी ने किया। यह विरोध इतना बढ़ गया कि केंद्र सरकार ने गैरकानूनी गतिविधि कानून 1967 के तहत एनडीएफबी को गैर कानूनी घोषित कर दिया। बोडो उग्रवादियों पर हिंसा, जबरन उगाही और हत्या का आरोप है। इस हिंसा में 2823 लोगों की जान जा चुकी है।
इस त्रिपक्षीय समझौते पर असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, एनडीएफबी के चार गुटों के नेतृत्व, एबीएसयू, गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्येंद्र गर्ग और असम के मुख्य सचिव कुमार संजय कृष्ण ने गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए। वहीं, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने इसे एक ऐतिहासिक समझौता बताया और साथ ही कहा कि, बोडो मुद्दे का व्यापक हल मिल सकेगा।