नई दिल्ली : इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट में एक साथ 9 जजों ने पदभार संभाल लिया है। जिन्हें शपथ मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना ने दिलाई। जो 9 लोग आज सुप्रीम कोर्ट जज बने हैं, उनमें से 8 हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस या जज हैं। उनके अलावा एक वरिष्ठ वकील भी सीधे सुप्रीम कोर्ट जज नियुक्त हुए हैं। इन जजों के साथ ही शीर्ष अदालत में सीजेआई रमण समेत जजों की संख्या बढ़कर 33 हो जाएगी, जबकि स्वीकृत संख्या 34 है।
पहली बार हुआ लाइव प्रसारण
आमतौर पर चीफ जस्टिस के कोर्ट रूम में होने वाला यह कार्यक्रम इस बार कुछ अलग था। नए जजों का शपथ ग्रहण कार्यक्रम सुप्रीम कोर्ट के नए भवन में बने सभागार में हुआ। नौ नए न्यायाधीशों में तीन महिला न्यायाधीश शामिल हैं। इस ऑडिटोरियम में 900 लोगों के बैठने की व्यवस्था है। साथ ही पहली बार जजों के शपथ ग्रहण कार्यक्रम का दूरदर्शन पर सीधा प्रसारण भी किया गया।

इन नौ नए न्यायाधीश ने ली शपथ
शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों के रूप में पद की शपथ लेने वाले नौ नए न्यायाधीशों में शामिल हैं- न्यायमूर्ति अभय श्रीनिवास ओका, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार माहेश्वरी, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना, न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार, न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश, न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और पीएस नरसिम्हा।
2027 में जस्टिस नागरत्ना बन सकती हैं पहली महिला CJI
इन जजों में से भविष्य में जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी वी नागरत्ना और पी एस नरसिम्हा भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने की संभावना हैं। अब तक सुप्रीम कोर्ट में कोई भी महिला चीफ जस्टिस नहीं हुई है। सितंबर 2027 में जस्टिस नागरत्ना के रूप में भारत को पहली महिला चीफ जस्टिस मिल सकती है। जस्टिस नागरत्ना पूर्व सीजेआई ई एस वेंकटरमैया की बेटी हैं। इन नौ नए जजों में से तीन जस्टिस नाथ, नागरत्ना और नरसिम्हा सीजेआई बनने की कतार में हैं।
बता दें कि, नौ नए जजों के नामों को सीजेआई रमण की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम ने 17 अगस्त को हुई बैठक में मंजूरी दी थी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट में नए जजों की नियुक्ति को लेकर 21 माह से जारी गतिरोध खत्म हो गया। इस गतिरोध के कारण ही 2019 के बाद से एक भी नए जज की नियुक्ति शीर्ष कोर्ट में नहीं हो सकी थी। 17 नवंबर 2019 को तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की बिदाई के बाद से यह गतिरोध कायम था।