मध्यप्रदेश की राजनीति में जमीन खरीद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार पर बड़े पैमाने पर जमीन खरीद में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कई सवाल उठाए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े लोगों द्वारा बड़ी मात्रा में जमीन खरीदी गई। कांग्रेस का दावा है कि इनमें से कुछ जमीनें उन क्षेत्रों में स्थित हैं जहां बाद में सड़क, हाईवे और अन्य विकास परियोजनाओं की घोषणाएं हुईं।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि विकास परियोजनाओं की जानकारी पहले से उपलब्ध थी और उसी आधार पर जमीन खरीदी गई, तो इसकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या इन परियोजनाओं को लेकर शासन स्तर पर पहले कोई चर्चा हुई थी और क्या जमीन खरीद में किसी विशेष जानकारी का उपयोग किया गया।
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री, उनके परिवार और कथित रूप से संबंधित कंपनियों की स्वतंत्र ऑडिट जांच कराने की मांग की है। साथ ही पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सिटिंग जज की निगरानी में कराने की मांग भी दोहराई गई है, ताकि मामले की पारदर्शिता बनी रहे।

कांग्रेस का आरोप है कि जमीनों की कीमतों में असामान्य वृद्धि से कुछ प्रभावशाली लोगों को लाभ मिला, जबकि किसानों को उसका अपेक्षित फायदा नहीं मिल पाया। पार्टी का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह गंभीर मामला हो सकता है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
फिलहाल कांग्रेस ने अपने आरोप सार्वजनिक किए हैं और जांच की मांग की है। दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव या भारतीय जनता पार्टी की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इस मामले को लेकर आगे की स्थिति पर सभी की नजर बनी हुई है।