भोपाल। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। पटवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देश के बाद नगर निगम की कार्रवाई और करीब 1,800 नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे हजारों परिवारों की आजीविका, छोटे कारोबार और वर्षों से चली आ रही व्यवस्थाओं पर असर पड़ने की आशंका है।
पटवारी ने कहा कि वर्षों से जिन क्षेत्रों में दुकान, कार्यालय, क्लिनिक, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होती रही हैं, वहां नागरिकों को अचानक पूरी तरह जिम्मेदार ठहराना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इन गतिविधियों के दौरान सरकारी स्तर पर कर, लाइसेंस अथवा अन्य अनुमतियां दी जाती रही हैं तो मौजूदा स्थिति के लिए सरकार और नगर नियोजन संस्थाओं की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

करीब दो दशक पुराने मास्टर प्लान पर सवाल
जीतू पटवारी ने कहा कि वर्ष 1975 के बाद भोपाल के केवल 1991 और 2005 के डेवलपमेंट प्लान स्वीकृत हुए हैं और 2005 का प्लान अभी भी प्रभावी है। उन्होंने कहा कि भोपाल विकास योजना-2031 का ड्राफ्ट फरवरी 2024 में वापस किया गया था और दिसंबर 2025 तक संशोधित ड्राफ्ट प्रस्तुत नहीं हुआ।पटवारी के मुताबिक शहर की आबादी, यातायात, रोजगार, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यावसायिक गतिविधियां तेजी से बढ़ चुकी हैं। ऐसे में पुराने भू-उपयोग मानचित्र के आधार पर वर्तमान भोपाल का नियोजन करना गंभीर चुनौती है।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार लंबे समय से सत्ता में है। इसके बावजूद राजधानी के लिए अद्यतन और लागू मास्टर प्लान का न होना सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन हो, लेकिन सरकार जिम्मेदारी भी ले
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन होना चाहिए, लेकिन न्यायालय के आदेश का अनुपालन और सरकार की नियोजन संबंधी जिम्मेदारी दो अलग-अलग विषय हैं।उन्होंने सरकार से केवल सीलिंग और सर्वे की कार्रवाई तक सीमित न रहने की अपील करते हुए 10 सुझाव सामने रखे।
जीतू पटवारी के 10 सुझाव
भोपाल विकास योजना-2031 तत्काल सार्वजनिक की जाए और संशोधित योजना लागू करने की समयसीमा बताई जाए।
GIS आधारित ‘Existing Use’ सर्वे कराया जाए, जिससे आवासीय, व्यावसायिक, मिश्रित उपयोग और अन्य श्रेणियों का वैज्ञानिक निर्धारण हो सके।
वर्षों से संचालित कारोबारों के लिए नीति बनाई जाए और जहां संभव हो वहां स्थानांतरण, नियमितीकरण या पुनर्वर्गीकरण की कानूनी संभावनाएं तलाश की जाएं।
Mixed Land Use की स्पष्ट नीति तैयार की जाए, ताकि यातायात, पार्किंग, अग्नि सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सके।
छोटे व्यापारियों के लिए नए Commercial Zones विकसित किए जाएं और कार्रवाई से प्रभावित लोगों के लिए किफायती वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए जाएं।
रहवासियों के अधिकार सुरक्षित किए जाएं और ट्रैफिक, पार्किंग, शोर व सुरक्षा जैसी समस्याओं के आधार पर वैज्ञानिक वर्गीकरण किया जाए।
एकीकृत भोपाल शहरी नियोजन प्राधिकरण पर विचार किया जाए, जिससे नगर निगम, नगर तथा ग्राम निवेश, BDA, यातायात और अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय हो सके।
नागरिकों और व्यापारियों की सार्वजनिक सुनवाई कर प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं को दर्ज किया जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।मास्टर प्लान की हर पांच वर्ष में समीक्षा की वैधानिक व्यवस्था बनाई जाए, ताकि विकास योजनाएं दशकों तक लंबित न रहें।
सरकार श्वेत-पत्र जारी करे, जिसमें 2005 मास्टर प्लान से लेकर 2031 ड्राफ्ट तक की प्रक्रिया, देरी और फरवरी 2024 में ड्राफ्ट लौटाए जाने से जुड़े कारणों का विवरण सार्वजनिक किया जाए।
‘भोपाल को नोटिस और सीलिंग नहीं, नया मास्टर प्लान चाहिए’
जीतू पटवारी ने कहा, “भोपाल को सीलिंग बनाम व्यापार अथवा रहवासी बनाम व्यापारी के संघर्ष में धकेलना समाधान नहीं है।”उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी नियोजन संबंधी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिसमें सुरक्षित आवास, व्यवस्थित बाजार और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप वैज्ञानिक शहरी ढांचा एक साथ विकसित हो।पटवारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए भी सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वर्षों की नियोजन संबंधी खामियों का आर्थिक और सामाजिक बोझ अकेले भोपाल की जनता पर न पड़े। उन्होंने स्पष्ट कहा, “भोपाल को नोटिस और सीलिंग नहीं, स्पष्ट नीति और नया मास्टर प्लान चाहिए।”
पूरे मध्यप्रदेश के लिए कार्ययोजना की मांग
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि भोपाल के बाद इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में भी इसी तरह की परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। ऐसे में सरकार को समय रहते पूरे मध्यप्रदेश के लिए विस्तृत शहरी नियोजन कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से इस विषय पर तत्काल समयबद्ध कार्ययोजना घोषित करने और भोपाल के नागरिकों, व्यापारियों तथा रहवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए न्यायसंगत समाधान सुनिश्चित करने का आग्रह किया।