गोरखपुर: गोरखनाथ मंदिर में ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 57वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 12वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा का छठवां दिन श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। वृंदावन से आए कथा व्यास जगद्गुरु स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य जी महाराज ने श्रद्धालुओं को भगवान की कथा के महत्व और उसके आध्यात्मिक प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया।
कथा कार्यक्रम में गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए। कथा श्रवण से पहले उन्होंने व्यास पीठ का विधिवत पूजन किया और इसके बाद श्रद्धापूर्वक श्रीमद्भागवत कथा सुनी। कथा के समापन पर मुख्यमंत्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती उतारी। इस अवसर पर मंदिर परिसर में संत समाज और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही।
कथा व्यास स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य ने कहा कि भगवान की कथा में विभिन्न अवस्थाओं में जीवन जी रहे लोगों के कल्याण की क्षमता है। उन्होंने जीवों को बद्ध संसारी, मुमुक्षु और सिद्ध मुक्त की श्रेणियों में बताते हुए कहा कि भगवान की कथा व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक जागृति पैदा करने का माध्यम बनती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य सांसारिक मोह और भावनात्मक बंधनों में इस तरह उलझ जाता है कि उसे अपने बंधन का एहसास भी नहीं रहता। भगवान की कथा धीरे-धीरे इन बंधनों के प्रभाव को कम कर मुक्ति की इच्छा को जागृत करती है।
स्वामी राजेंद्रदास जी ने भगवान की कथा की तुलना मीठे शरबत से करते हुए कहा कि जिस प्रकार शरबत शरीर को राहत और स्वाद देता है, उसी प्रकार कथा मन को आनंद देने के साथ जीवन के विकारों को दूर करने में सहायक होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि व्यक्ति अपनी वर्तमान परिस्थितियों में रहते हुए भी भगवान की कथा का आश्रय ले सकता है। इसके माध्यम से जीवन में सकारात्मक बदलाव और आध्यात्मिक कल्याण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
छठवें दिन कथा की शुरुआत गीतावली के पाठ और श्रीरामचरित के वर्णन से हुई। इसके बाद सालासर बालाजी के प्राकट्य और हनुमान जी की भक्ति से जुड़े प्रसंग सुनाए गए। कथा व्यास ने कहा कि व्यक्ति को अपने प्रभाव के साथ-साथ अपने स्वभाव को भी बेहतर बनाने का प्रयास करना चाहिए। उनके अनुसार प्रभाव तभी सार्थक होता है, जब उसके साथ व्यवहार और स्वभाव में भी सुंदरता हो। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए पूतना वध का प्रसंग सुनाया गया। उन्होंने बताया कि भगवान अपने भक्तों के भाव को स्वीकार करते हैं और उनके कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

स्वामी राजेंद्रदास जी ने कथा श्रवण के चार प्रमुख लाभ बताए। इनमें सांसारिक कामनाओं और तृष्णा से मुक्ति, अंतःकरण की शुद्धि, भगवान की भक्ति और संत-साधुओं के प्रति जुड़ाव शामिल हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान के नाम का नियमित स्मरण करने का आग्रह किया। साथ ही गृहस्थ परिवारों को प्रतिदिन कम से कम एक घंटे परिवार के साथ सत्संग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इससे घर का वातावरण सकारात्मक बनाने और बच्चों में अच्छे संस्कार विकसित करने में मदद मिलती है।
कथा के दौरान संत, ब्राह्मण और गाय के प्रति सम्मान और श्रद्धा का संदेश भी दिया गया। कथा व्यास ने गाय की सेवा और उसके प्रति प्रेम को धार्मिक जीवन से जोड़ते हुए श्रद्धालुओं को सेवा भाव अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में गोबर के पारंपरिक उपयोग से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का भी उल्लेख किया।
श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन स्वामी विद्याचैतन्य जी महाराज, अयोध्या के महंत धर्मदास जी महाराज, महंत लालनाथ जी महाराज समेत कई संत और गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम में विधायक प्रदीप शुक्ल, विधायक विपिन सिंह, पुष्पदंत जैन, संजय सिंह, अजय सिंह, जितेंद्र बहादुर चंद, महेश पोद्दार और विकास जालान सहित अन्य लोगों ने भी सहभागिता की। कथा का समापन श्रीमद्भागवत महापुराण की आरती और प्रसाद वितरण के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीभगवान सिंह ने किया।