नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में राष्ट्रीय रबी सम्मेलन-2026 में कृषि क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। सम्मेलन में किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने, निर्यात योग्य कृषि उत्पादन बढ़ाने, खाद की उपलब्धता और फसल विविधीकरण समेत विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से मिलने वाले अवसरों की जानकारी किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। कृषि अधिकारियों के माध्यम से किसानों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों और निर्यात की संभावनाओं के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मिलेट्स, फल, सब्जियों और अनाज जैसे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता तथा उत्पादन को इस तरह बढ़ावा देने की जरूरत है, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सके। उनके अनुसार कई वैश्विक बाजारों में भारतीय उत्पादों के लिए शून्य आयात शुल्क की संभावनाएं उपलब्ध हैं।
रबी सीजन के लिए 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक प्रस्तावित ‘खेत बचाओ अभियान’ के दौरान किसानों को मिट्टी की सेहत के साथ FTA और कृषि निर्यात से जुड़े अवसरों की जानकारी देने की बात कही गई। अभियान के तहत संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
शिवराज सिंह चौहान ने पराली जलाने और प्रदूषण के मुद्दे पर कहा कि प्रदूषण के लिए केवल किसानों को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से प्रदूषण में कुछ योगदान हो सकता है, लेकिन प्रदूषण के पूरे स्तर के लिए इसे एकमात्र कारण नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने पंजाब और हरियाणा के ऐसे गांवों का भी उल्लेख किया, जहां किसान डायरेक्ट सीडिंग जैसी तकनीकों को अपना रहे हैं और पराली जलाने से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
सम्मेलन में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित कृषि क्षेत्रों की स्थिति पर भी चर्चा हुई। चौहान ने बताया कि कर्नाटक के आग्रह पर 3 अक्टूबर को केंद्रीय टीम भेजी जाएगी। महाराष्ट्र में भी स्थिति का आकलन करने के लिए केंद्रीय टीम भेजे जाने की जानकारी दी गई। उन्होंने प्रभावित राज्यों का स्वयं दौरा कर स्थिति की समीक्षा करने की बात भी कही। केंद्रीय मंत्री के अनुसार कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में भारी बारिश एवं बाढ़ से करीब 6.11 लाख हेक्टेयर फसल प्रभावित होने की सूचना मिली है और नुकसान का आकलन जारी है।

चौहान ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ ICAR के सहयोग से तैयार कंटिंजेंसी प्लान के चलते खरीफ सीजन में बोनी का कुल क्षेत्रफल पिछले साल की तुलना में करीब एक प्रतिशत ही कम रहा। धान के रकबे में लगभग 16.32 लाख हेक्टेयर की कमी बताई गई, जबकि मक्का, सोयाबीन और कपास के क्षेत्रफल में भी कुछ कमी आई। दूसरी ओर उड़द, बाजरा, ज्वार, तिल, सूरजमुखी और तुअर जैसी फसलों के रकबे में बढ़ोतरी की जानकारी दी गई।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने रबी सीजन के दौरान खाद की पर्याप्त उपलब्धता का भरोसा जताया। उन्होंने किसानों से मिट्टी की आवश्यकता के अनुसार उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल पर जोर दिया। कृषि अधिकारियों को भी किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने की बात कही गई।
चौहान ने देश की कृषि विकास यात्रा को तीन चरणों में बताते हुए कहा कि 1967-1995 के बीच खाद्यान्न उत्पादन की औसत वार्षिक वृद्धि 4.1 मिलियन टन और 1996-2014 के दौरान 3.9 मिलियन टन रही। उनके अनुसार 2015 के बाद यह औसत वृद्धि बढ़कर 8.4 मिलियन टन हो गई। उन्होंने बताया कि 2015 के बाद कृषि क्षेत्र की औसत विकास दर 4.5 प्रतिशत रही, जबकि इससे पहले के दोनों चरणों में यह करीब 3 प्रतिशत के आसपास थी।
राष्ट्रीय रबी सम्मेलन में कृषि उत्पादन को बाजार से जोड़ने और किसानों को घरेलू जरूरतों के साथ अंतरराष्ट्रीय मांग के अनुरूप उत्पादन के अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। FTA, निर्यात, फसल विविधीकरण, मिट्टी संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों को किसानों तक पहुंचाने की दिशा में विभागीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की बात सामने आई।