नई दिल्ली, 30 सितंबर 2026: भारतीय किसान संघ की ओर से अखिल भारतीय महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन नई दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में किया गया। देश के अलग-अलग राज्यों और गांवों से बड़ी संख्या में महिला किसान कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल हुईं। कार्यक्रम की शुरुआत गौ-पूजन, भगवान बलराम पूजन और ध्वजारोहण के साथ हुई। इसके बाद ‘हम भारत की नारियां वैभव लायेंगी’ के उद्घोष से पूरा स्टेडियम गूंज उठा।
उद्घाटन सत्र में कोटा कृषि विश्वविद्यालय की कुलपति एवं मुख्य अतिथि प्रो. विमला डूँकवाल ने महिला शक्ति की भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाएं सृजन और संवर्धन दोनों की क्षमता रखती हैं। उनके अनुसार महिलाएं अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी प्राथमिकता देती हैं।

अखिल भारतीय महिला संयोजिका मंजू दीक्षित ने सम्मेलन की प्रस्तावना रखते हुए महिला किसानों की पारंपरिक छवि में बदलाव की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं आधुनिक तकनीक और नई ऊर्जा के माध्यम से कृषि के साथ परिवार और देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। सम्मेलन को अखिल भारतीय अध्यक्ष के. साईं रेड्डी, उपाध्यक्ष सुशीला विश्नोई और मंत्री वीना सतीश ने भी संबोधित किया।
समापन सत्र में भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने 2047 के विकसित और स्वस्थ भारत के लक्ष्य पर बात की। उन्होंने कहा कि ‘गौ-कृषि-वाणिज्यम्’ और जैविक खेती को बढ़ावा दिए बिना इस लक्ष्य की कल्पना पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने सरकार से जहरमुक्त खेती, रोगमुक्त समाज और अमृत आहार आधारित नीतियों पर काम करने का आह्वान किया। वहीं अखिल भारतीय संगठन मंत्री दिनेश कुलकर्णी ने कहा कि जब महिला किसानों को स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता के साथ सम्मान मिलेगा, तो इसका सकारात्मक प्रभाव गांव, परिवार और समाज पर पड़ेगा।

सम्मेलन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिला किसानों को सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वालों में महाराष्ट्र की सुनंदा सायसिंग को ‘गौ-कृषि-वाणिज्यम्’, पश्चिम बंगाल की दीपाली ओरांव को जैविक कृषि और गुजरात की कमला बेन को बीज संरक्षण के लिए सम्मानित किया गया। पशुपालन के क्षेत्र में पश्चिम बंगाल की अंबा कालिंधी और पंपा गराई, रोजगार सृजन के लिए बिहार की पुष्पा सिंह तथा खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में ओडिशा की माया सिन्हा महापात्रा और पश्चिम बंगाल की सुलता चटर्जी एवं शुक्ला बैरागी को सम्मान मिला।
सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचीं महिला किसान अपने-अपने राज्यों की पारंपरिक वेशभूषा में नजर आईं। महिलाओं ने क्षेत्रीय भाषाओं में लोकगीत प्रस्तुत किए और सांस्कृतिक नृत्य के जरिए भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित किया। इस दौरान स्टेडियम में ‘विविधता में एकता’ का दृश्य देखने को मिला।
सम्मेलन की एक खास बात यह रही कि इसमें शामिल होने वाली महिला किसान अपने टिकट और यात्रा खर्च पर दिल्ली पहुंचीं। सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में कृषि क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों और समस्याओं पर चर्चा हुई। महिला किसानों ने इन मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए समाधान की दिशा में तत्काल कदम उठाने की मांग की। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल जी, राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह-संपर्क प्रमुख रितु शर्मा समेत भारतीय किसान संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।