भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इंदौर में सड़क निर्माण और पुनर्निर्माण पर हुए खर्च को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जवाब मांगा है। पटवारी ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में इंदौर नगर निगम ने सीमेंट-कांक्रीट सड़कों पर करीब 800 करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन इसके बावजूद शहर की कई सड़कें खराब स्थिति में हैं।
पटवारी ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पहले से बनी सीमेंट-कांक्रीट सड़कों को तोड़कर दोबारा बनाया गया। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब सड़कें पहले से मौजूद थीं, तो उनके पुनर्निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी और इन कार्यों पर कितना खर्च हुआ। इंदौर में सड़क निर्माण पर करीब 800 करोड़ रुपये के खर्च और पुरानी सीसी सड़कों के पुनर्निर्माण को लेकर हालिया रिपोर्टों में भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए निर्माण, टेंडर और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सड़कों के लिए निर्धारित डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (DLP) पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि इंदौर में सीसी सड़कों के लिए तीन साल की DLP निर्धारित है, जबकि कुछ अन्य शहरों में यह अवधि अधिक होने की जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर में सीसी सड़कों के लिए तीन साल की DLP को लेकर तकनीकी विशेषज्ञों और पूर्व अधिकारियों ने भी सवाल उठाए हैं।

जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि पांच वर्षों में सड़क निर्माण के नाम पर करीब 800 करोड़ रुपये खर्च किए जाने के बावजूद शहर की सड़कों की स्थिति में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं हुआ। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पुरानी सड़कों को तोड़कर दोबारा बनाने की जरूरत क्यों पड़ी और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय की गई। उन्होंने एमआर-10 से एमआर-9 लिंक रोड के करीब 800 मीटर हिस्से की खराब स्थिति का हवाला देते हुए भी जवाब मांगा।
पटवारी ने पिछले पांच वर्षों में इंदौर में सड़क निर्माण और पुनर्निर्माण पर हुए खर्च का सड़कवार ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सड़क के संबंध में खर्च की गई राशि, संबंधित ठेकेदार, निर्माण की तारीख, DLP और दोबारा निर्माण की वजह सार्वजनिक की जानी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि जांच में निर्माण कार्यों में अनियमितता, लापरवाही या गुणवत्ता से जुड़ी कमी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। पटवारी ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद इंदौर की सड़कों की स्थिति में सुधार क्यों नहीं हुआ और सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों में जवाबदेही किस स्तर पर तय की गई है।