शिवसेना नेता संजय राउत 2 फरवरी को दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर गाजीपुर में किसानों के विरोध स्थल पर पहुंचे, जहां उन्होंने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत से मुलाकात की।
संजय राउत गाजीपुर पहुंचे तब किसानों के विरोध स्थल पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई। उस समय राउत सहित कुछ लोगों ने मास्क पहन रखे थे। राउत दोपहर में करीब एक बजे किसान विरोध स्थल पर पहुंचे और मंच के पास टिकैत और अन्य प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की।
उस दौरान टिकैत ने कहा, “किसानों का विरोध राजनीतिक है और किसी भी राजनेता को मंच पर माइक या स्थान नहीं दिया गया है।” 2019 तक बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का एक प्रमुख हिंदुत्व सहयोगी शिवसेना उन 19 विपक्षी दलों में से एक था, जिसने 29 जनवरी को बजट सत्र से पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार किया और किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया।
आप को बता दे की इससे पहले शिरोमणि अकाली दल, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, राष्ट्रीय लोक दल, समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं ने गाजीपुर का दौरा किया था, जो अब दो महीने से अधिक समय के लिए बीकेयू के नेतृत्व वाले प्रदर्शनकारी किसान दो महीने से अधिक समय से यहां डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारी किसान नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं।
किसानों की मांग है कि सरकार तीनो कृषि कानून को वापस ले। उनका कहना है कि वह अपना प्रदर्शन तब तक चालू रखेंगे जब तब ये तीनों कानूनों को वापस नहीं लिया जायेगा। हालांकि, सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि नए कानून किसानों के लिए बेहतर अवसर लाएंगे और कृषि में नई तकनीकों को पेश करेंगे।
शुरू में किसान संगठनों ने कहा था कि उनका आंदोलन राजनीतिक नहीं है लेकिन हाल ही में उन्होंने खुले मन से नेताओं का स्वागत किया है।
राकेश टिकैत ने 31 जनवरी को कहा था कि संयुक्त किसान मोर्चा ने नए केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में राजनीतिक दलों को अनुमति नहीं दी थी, लेकिन विरोध स्थलों पर ‘लोकतंत्र का मज़ाक उड़ाने के बाद ही’ राजनीतिक दलों से समर्थन लिया।