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सड़क के बीचोंबीच बिजली का खंभा, फिर भी बन गई सीसी रोड: मैहर के जल्हा गांव में निर्माण कार्य पर उठे सवाल

मैहर के जल्हा गांव में सीसी सड़क निर्माण के दौरान सड़क के बीचोंबीच मौजूद हाई वोल्टेज बिजली के खंभे को हटाए बिना ही सड़क बना दी गई। करीब 2.92 लाख रुपये की लागत से बनी इस सड़क को लेकर निर्माण गुणवत्ता और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। मामले का संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत CEO ने जांच और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

By: Nivedita 
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सड़क के बीचोंबीच बिजली का खंभा, फिर भी बन गई सीसी रोड: मैहर के जल्हा गांव में निर्माण कार्य पर उठे सवाल

मैहर जिले के जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कंचनपुर के जल्हा गांव में सीसी सड़क निर्माण का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। गांव के पहुंच मार्ग पर बनाई गई सीसी सड़क के ठीक बीचोंबीच उच्च वोल्टेज बिजली का खंभा जस का तस छोड़ दिया गया, जबकि सड़क का निर्माण उसके चारों ओर कर दिया गया। करीब 100 मीटर लंबी इस सड़क का निर्माण लगभग 2.92 लाख रुपये की लागत से कराया गया है। निर्माण पूरा होने के बाद अब यह खंभा सड़क के बीच स्थायी अवरोध बन चुका है, जिससे रोजाना गुजरने वाले ग्रामीणों, वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सड़क के बीच खंभा बना दुर्घटना का खतरा

ग्रामीणों के अनुसार सड़क प्राथमिक विद्यालय की बाउंड्रीवाल से सटी हुई है। ऐसे में स्कूल आने-जाने वाले बच्चों के लिए यह खंभा सुरक्षा की दृष्टि से चिंता का विषय बन गया है। खासकर रात के समय कम रोशनी में वाहन चालकों के लिए यह बड़ा हादसा साबित हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण से पहले बिजली के खंभे को हटाने या स्थानांतरित करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई, जिसके कारण अब सड़क उपयोगकर्ताओं को जोखिम उठाकर आवागमन करना पड़ रहा है।

निर्माण कार्य की निगरानी पर उठे सवाल

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े उपयंत्री योगेंद्र सिंह परमार से इस संबंध में जानकारी मांगी गई। उन्होंने बताया कि उन्होंने मौके का निरीक्षण ही नहीं किया।इस बयान के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी ने स्थल का निरीक्षण नहीं किया, तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और सुरक्षा संबंधी पहलुओं का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया।

 

कई अहम सवालों के जवाब बाकी

इस पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आ रहे हैं—

क्या सड़क निर्माण शुरू होने से पहले बिजली के खंभे को हटाने का प्रस्ताव तैयार किया गया था?
क्या बिजली विभाग के साथ आवश्यक समन्वय किया गया?
तकनीकी स्वीकृति देते समय सड़क के बीच मौजूद खंभे को क्यों नजरअंदाज किया गया?
क्या निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों का पालन किया?
जिला पंचायत CEO ने दिए जांच के निर्देश

मामला सार्वजनिक होने के बाद जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) शैलेंद्र सिंह ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

ग्रामीणों की मांग: जल्द हटे बिजली का खंभा

गांव के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क के बीच स्थित बिजली के खंभे को जल्द से जल्द दूसरी जगह स्थानांतरित किया जाए, ताकि सड़क सुरक्षित बन सके और भविष्य में किसी दुर्घटना की संभावना समाप्त हो।

निष्कर्ष

जल्हा गांव की यह सड़क केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि सरकारी परियोजनाओं में निगरानी, समन्वय और जवाबदेही की स्थिति पर भी सवाल खड़े करती है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो यह लापरवाही भविष्य में किसी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।

 

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