दिल्ली विधानसभा चुनाव वोटों की गिनती चल रही है। तीन राउंड की काउंटिंग हो चुकी है। 70 सीटों के रुझान में आम आदमी पार्टी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। 2015 के मुकाबले बीजेपी को भी अच्छा फायदा होता दिख रहा है, लेकिन कांग्रेस का अब तक खाता नहीं खुला है। चुनाव आयोग के मुताबिक, आम आदमी पार्टी 29 सीटों पर आगे है, बीजेपी 19 सीटों पर बढ़त। वोट फीसदी में करीब 10 पर्सेंट का अंतर है, सीटों की कई संख्या के लिहाज से आम आदमी पार्टी को पिछली बार की तुलना में नुकसान हुआ है।
अभी तक के नतीजों पर दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा, अभी के जो रुझान हैं, लगातार हमारी स्थिति लगातार बेहतर हो रही है। हम एग्जिट पोल से बेहतर स्थिति में हैं। आगे के चरणों में गिनती पर ही स्थिति साफ हो पाएगी। निराश होने की जरूरत नहीं है
दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवार ने अभी तक के नतीजों पर कहा है कि, अभी के जो रुझान हैं, लगातार हमारी स्थिति लगातार बेहतर हो रही है। एम एग्जिट पोल से बेहतर स्थिति में हैं। आगे के चरणों में गिनती पर ही स्थिति साफ हो पाएगी। निराश होने की जरूरत नहीं है।
चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक, 68 सीटों के रुझान आए हैं, आम आदमी पार्टी 50 सीटों पर आगे है, भारतीय जनता पार्टी 18 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।
आम आदमी पार्टी 52 और भारतीय जनता पार्टी 18 सीटों पर आगे है। कांग्रेस को किसी भी सीट पर बढ़त नहीं।

आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले ही अपने कई कामों के जरिए जनता को अपनी ओर खिंचने की कोशिश किया, जिसका असर इस वक्त देखने को मिल रहा है। दिल्ली में 200 यूनिट बिजली फ्री देकर और महिलाओं का बसों में किराया फ्री कर आप ने लोगों को अपनी ओर खिंचा। आप के द्वारा उठाया गया यह कदम इस वक्त देखने को मिल रहा है। आप इस वक्त 43 सीटों से आगे चल रही है।
बीजेपी ने भी जमकर चुनाव प्रचार में आम आदमी को घेरने की कोशिश की लेकिन इस वक्त नाकामयाब साबित होती नजर आ रही है। बीजेपी ने जहां चुनाव में प्रचार के दौरान केजरीवाल के कामों पर हमला कर कहा कि, दिल्ली में लोगों को गंदा पानी पिलाया जा रहा है, स्कूलों का हाल बदतर है, बसों को बढ़ाने की बात हुई थी लेकिन और घटा दी गई, इसी तरह बीजेपी ने कई और मुद्दों पर आप सरकार को घेरने की कोशिश की थी लेकिन इस वक्त बीजेपी आप से पीछे चल रही है। बीजेपी के खाते में इस वक्त 19 सीटें ही आ पाई है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने नागरिकता संशोधन कानून और NRC के विरोध में सरकार पर जमकर हमला की, वहीं बेरोजगारी और GDP जैसे मुद्दे को लेकर चुनाव में उतरी कांग्रेस पार्टी इस वक्त जीरो पर ही है।