केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि एससी/एसटी समुदायों को नौकरियों में प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले को दुरुस्त करने को सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए। वहीं, दलित सांसदों ने रामविलास पासवान के घर पर बैठक भी की और आरक्षण के साथ इंडियन जुडिशल सर्विसेज के गठन पर सहमति बनाई।
एक अखबार से बात करते हुए पासवान ने कहा कि, बैठक में शामिल हुए सभी सांसदों ने न्यायपालिका में आरक्षण की मांग की और इंडियन जुडिशल सर्विसेज के गठन की मांग की क्योंकि कमजोर तबके से संबंधित मामला जब भी कोर्ट में जाता है, फंस जाता है। पासवान ने आगे कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा IAS और भारतीय पुलिस सेवा IPS की तरह भारतीय न्यायापालिका सेवा का गठन हो। इसमें नियुक्ति एक प्रतियोगी परीक्षा के जरिए हो जिसमें उचित आरक्षण भी लागू हो।
इसके आगे केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, वह भी IJS के गठन के विचार का दो वजहों से समर्थन करते हैं। इससे पारदर्शिता आएगी, क्योंकि मौजूदा सिस्टम में इसका अभाव है और दूसरा इसमें समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व होगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि, सरकार संसद में IJS को लेकर सकारात्मक जवाब दे चुकी है। सरकार प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है।
शुक्रवार को रामविलास पासवान ने कहा था कि, एससी/एसटी समुदायों के लिए नौकरियों में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले में सुधार के लिए सरकार को एक अध्यादेश लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि, इस तरह के सभी मुद्दों को संविधान की ‘नौवीं अनुसूची’ में डाल देना चाहिए ताकि उन्हें न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर रखा जा सके।
उन्होंने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ एक पुनर्विचार याचिका दायर करने और इस विषय पर कानूनी राय लेने पर विचार कर रही है। पुनर्विचार याचिका का विकल्प है लेकिन यह विषय फिर से न्यायालय में जाएगा, यह देखना होगा कि यह सफल होता है या नहीं। इसलिए, मेरे विचार से आसान तरीका एक अध्यादेश जारी करना और संविधान में संशोधन करना होगा।