बुधनी। नगर के वार्ड क्रमांक-10 स्थित झंडा चौक और नर्मदा घाट क्षेत्र में वर्ष 1963 से स्थापित एक विद्युत पोल को हटाने की तैयारी के बाद विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने आरोप लगाया है कि जहां जनहित से जुड़े बिजली सुधार कार्य वर्षों से लंबित हैं, वहीं एक निजी आवेदन पर विभाग द्वारा 24 घंटे के भीतर कार्रवाई शुरू किए जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।जानकारी के अनुसार शासकीय भूमि स्थित खसरा नंबर-172 पर लगे इस विद्युत पोल से आसपास के कई घरों की सर्विस लाइन जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद द्वारा इसी स्थान पर सीमेंट-कांक्रीट सड़क का निर्माण भी कराया गया है। ऐसे में पोल हटाए जाने से बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के साथ-साथ शासकीय भूमि पर संभावित अतिक्रमण की आशंका भी बढ़ सकती है।

स्थानीय लोगों के अनुसार संबंधित मकान मालिक ने अपने घर के सामने स्थित विद्युत पोल को अपने खर्च पर अन्य स्थान पर शिफ्ट करने के लिए बिजली विभाग को आवेदन दिया था। आरोप है कि आवेदन मिलने के अगले ही दिन विभागीय टीम ने नए स्थान पर पोल लगाने की तैयारी शुरू कर दी और सड़क की खुदाई भी प्रारंभ कर दी।क्षेत्रवासियों का कहना है कि प्रज्ज्वल योजना के तहत बुधनी घाट, माझी मोहल्ला और ग्वालटोली क्षेत्र में खुले बिजली तारों को हटाकर भूमिगत केबल बिछाने का कार्य लगभग पांच वर्षों से अधूरा पड़ा है। उनका दावा है कि खुले तारों के कारण कई बार स्पार्किंग की घटनाएं हुई हैं और करंट लगने से बंदरों की मौत के मामले भी सामने आए हैं। इसके बावजूद जनहित से जुड़े इस कार्य में अपेक्षित गति नहीं दिखाई गई।
स्थानीय नागरिकों ने यह भी दावा किया कि संबंधित मकान को लेकर पूर्व में नगर परिषद और बिजली विभाग की ओर से अतिक्रमण संबंधी नोटिस जारी किए गए थे। उनका आरोप है कि अब दुकान निर्माण की योजना के तहत विद्युत पोल हटाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं कुछ लोगों ने आशंका जताई कि यदि पोल को सड़क के बीच में स्थानांतरित किया गया तो यातायात और पार्किंग व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।क्षेत्रवासियों ने यह भी बताया कि आसपास स्थित आदिवासी समाज के पारंपरिक देवस्थल की धार्मिक और सामाजिक महत्ता को देखते हुए शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त रखने की मांग की जा रही है। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को भी ज्ञापन सौंपने की तैयारी की बात कही जा रही है।
इस पूरे मामले पर बिजली विभाग के कनिष्ठ यंत्री ने कहा कि संबंधित व्यक्ति ने अपने खर्च पर पोल शिफ्टिंग के लिए आवेदन दिया है। यदि किसी नागरिक को इस पर आपत्ति है तो भूमि अभिलेख, मकान संबंधी दस्तावेज और अन्य तथ्यों की जांच की जाएगी तथा नियमानुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।फिलहाल, स्थानीय नागरिकों और समाजसेवियों ने मांग की है कि पहले प्रज्ज्वल योजना के तहत लंबित भूमिगत केबल परियोजना पूरी की जाए और उसके बाद ही किसी भी पोल शिफ्टिंग संबंधी निर्णय पर विचार किया जाए। उनका कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।