नई दिल्ली : लखीमपुर खीरी की हिंसक घटना में मारे गए किसानों की अंतिम अरदास में शामिल हुईं कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई कांग्रेसी नेता शामिल हुए, लेकिन उन्हें यहां निराशा हाथ लगी। वे जिस जोश के साथ इस अरदास में शामिल होने गई थी, की उन्हें बोलने को मंच मिलेगा। वे चुनावी रोटियां सेकेंगी। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी की हिंसक घटना में मारे गए किसानों की अंतिम अरदास में कांग्रेस से प्रियंका गांधी वाड्रा, राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, यूपी कांग्रेस के प्रमुख अजय कुमार लल्लू पहुंचे। वहीं अकाली दल से मनजिंदर सिंह सिरसा पहुंचे। इस दौरान संयुक्त किसान मोर्चा ने नेताओं का आभार जताया लेकिन मंच पर नहीं आने दिया।
आशीष मिश्रा से पूछताछ शुरू
बता दें कि उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा मामले में आरोपी केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा को मंगलवार को अपराध शाखा कार्यालय ले जाया गया, जहां विशेष जांच दल (SIT) उससे गहन पूछताछ कर रही है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि अदालत से मंजूरी मिलने पर आशीष मिश्रा को पुलिस हिरासत में लिया गया।
तीन दिनों की पुलिस हिरासत
वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी (एसपीओ) एसपी यादव ने बताया कि अदालत (मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी) में आशीष मिश्रा को 14 दिन की पुलिस हिरासत में भेजने के लिए शनिवार को अर्जी दी गई थी जिस पर सुनवाई हुई और अदालत ने 12 से 15 अक्टूबर तक उसे पुलिस हिरासत में भेजने के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि आशीष मिश्रा का चिकित्सकीय परीक्षण कराया जाएगा और उसे पूछताछ के नाम पर पुलिस प्रताड़ित नहीं करेगी। यादव ने यह भी बताया कि इस दौरान उसके अधिवक्ता मौजूद रहेंगे।
SIT ने बताया रिमांड की वजह
उत्तर प्रदेश पुलिस की एसआईटी ने तीन अक्टूबर को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा के सिलसिले में आशीष मिश्रा को शनिवार को करीब 12 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया और आधी रात के बाद पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में लखीमपुर जिला जेल भेज दिया गया। एसआईटी का नेतृत्व कर रहे पुलिस उप महानिरीक्षक (मुख्यालय) उपेंद्र अग्रवाल ने शनिवार रात मिश्रा की गिरफ्तारी के बाद पत्रकारों को बताया कि, ”मिश्रा ने पुलिस के प्रश्नों का सही उत्तर नहीं दिया और जांच में सहयोग नहीं किया। वह सही बातें नहीं बताना चाह रहे हैं, इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया है।” लखीमपुर खीरी में तीन अक्टूबर को हुई हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी।