Lok Sabha Election 2024: मध्य प्रदेश की रतलाम-झाबुआ लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी अनीता सिंह चौहान के पक्ष में सैलाना में जनसभा करने पहुंचे सीएम मोहन ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर निशाना साधा। सीएम ने कहा कि कंस और कांग्रेस में कोई फर्क नहीं है, उन्होंने कहा कि जैसे कंस की नियत बुरी थी, वैसे ही कांग्रेस की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी ने जो काम किए हैं, 70 साल में वह नहीं हो पाए।
आमसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने राहुल गांधी के साफा उतारने की घटना पर भी कटाक्ष किया। सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने आदिवासियों के सम्मान स्वरूप दिए गए साफे को अपने सिर पर स्थान दिया। उन्होंने कहा ढीला मत बांधो, जोर से बांधों। यह हमारे भाई-बहनों का सम्मान है। वहीं राहुल गांधी को साफा बांधा गया तो उन्होंने आदिवासियों के सम्मान का स्वरूप यह साफा निकालकर फेंक दिया।

बता दें कि आज रतलाम लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी अनीता सिंह चौहान के पक्ष में दो आम सभा करने आए डॉ यादव ने कहा कि कांग्रेस सांप नेवला का खेल दिखाकर मंजन बेच रही है। आम जनता को इतने साल तक बस यही सपना दिखाया गया है कि हम सामने बुलाकर खेल दिखाएंगे, और खेल दिखाकर जैसे मदारी अपना मंजन बेंच कर चला जाता है वैसे ही यह अपनी सत्ता हथियाकर कर जनता को बेवकूफ बनाते हैं। यह सब बात उन्होंने रतलाम ग्रामीण विधानसभा की ग्राम बांगरोद में कही। इसके पहले सीएम ने सैलाना विधानसभा के सरवन में भाजपा के पक्ष में एक आम सभा को भी संबोधित किया।

रतलाम-झाबुआ संसदीय सीट प्रदेश की सबसे हॉट आदिवासी सीटों में से एक है। लेकिन इस बार यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है। दरअसल, भारत आदिवासी पार्टी ने रतलाम झाबुआ लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया है। इस सीट से पेटलावद विधानसभा चुनाव में जयस समर्थित भारत आदिवासी पार्टी से उम्मीदवार रहे इंजीनियर बालुसिंह गामड़ को टिकट दिया है। रतलाम जिले की सैलाना विधानसभा सीट भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के खाते में है। ऐसे में इस क्षेत्र में वर्चस्व रखने वाले जयस और बीएपी के प्रत्याशी में त्रिकोणीय मुकाबला होगा। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं, बीएपी के चुनाव लड़ने से खासकर भाजपा को नुकसान होने की ज्यादा संभावना दिख रही है।
रतलाम लोकसभा सीट इतिहास
रतलाम लोकसभा सीट को 2008 में हुए परिसीमन के बाद लोगों ने जाना, इससे पहले इस सीट को झाबुआ नाम से जाना जाता था। इस लोकसभा सीट में पूरा अलीराजपुर और झाबुआ जिला आता है। इन दो जिलों के अलावा इस सीट में रतलाम जिले का कुछ हिस्सा भी शामिल है। मध्य प्रदेश में झाबुआ जिला आदिवासियों के लिए जाना जाता है, यहां के तीज-त्यौहार भी आदिवासियों के रीति-रिवाजों के आधार पर मनाए जाते हैं। यहां पर हस्त शिल्प के कई छोटे-छोटे उद्योग भी हैं जो कि आदिवासियों के कल्चर को दर्शाते हैं।
रतलाम लोकसभा सीट को आदिवासी समुदाय के उम्मीदवारों के लिए रिजर्व किया गया है। इस लोकसभा सीट में भी 8 विधानसभाओं को शामिल किया गया है। जिसमें अलीराजपुर जिले की अलीराजपुर और जोबट, झाबुआ जिले की झाबुआ, ठंडला, पेटलावाद, रतलाम जिले की रतलाम रूरल, रतलाम सिटी और सैलाना विधानसभा शामिल हैं। इन विधानसभाओं में तीन पर कांग्रेस काबिज है, 4 पर बीजेपी और एक विधानसभा सीट पर भारत आदिवासी पार्टी ने जीत हासिल की है।
कांग्रेस का दबदबा
यह लोकसभा सीट लंबे वक्त तक कांग्रेस का अभेद्य किला रहा है। यहां से कांतिलाल भूरिया चुनाव लड़ा करते थे। कांतिलाल भूरिया यहां पर 1998 से लेकर 2009 तक लोकसभा चुनाव जीते हैं। उनकी जीत के इस रथ को 2014 में दिलीप सिंह भूरिया ने रोक दिया था। जिसके बाद यहां हुए उपचुनाव में कांतिलाल भूरिया ने फिर से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2019 में गुमान सिंह डामोर ने उन्हें शिकस्त दी थी।
करीब 1 लाख वोटों से हारे भूरिया
अगर 2019 के लोकसभा चुनाव की बात की जाए तो इस सीट पर कुल 18,51,112 वोटर्स हैं। यहां पर हुए चुनाव में कांग्रेस ने दिग्गज नेता कांतिलाल भूरिया को एक बार फिर से मौका दिया। वहीं बीजेपी ने गुमान सिंह डामोर को मैदान में उतारा था। इस चुनाव में बीजेपी के गुमान सिंह ने करीब 7 लाख वोट हासिल किए थे, जबकि कांतिलाल भूरिया को करीब 6 लाख वोटों से ही संतोष करना पड़ा था।
पिछले लोकसभा चुनाव 2019 बीजेपी ने यहां से गुमान सिंह डामोर को टिकट दिया था। जबकि कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया पर को प्रत्याशी बनाया था। गुमान सिंह डामोर को 696,103 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया को 6,05,467 वोट मिले थे। बीजेपी के डामोर ने भूरिया को 90,636 वोटों के भारी अंतर से हराया था।
रतलाम सीट से वर्तमान सांसद गुमान सिंह डामोर का टिकट कटने का बड़ा कारण पार्टी का सीट पर कराया गया आंतरिक सर्वे बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक सर्वे में गुमान सिंह डामोर रतलाम ग्रामीण सीट के अलावा कहीं पर भी लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार के तौर पर पहली पसंद नहीं बन पाए थे, वहीं अनिता नागर चौहान पांच विधानसभा सीटों पर पहली पसंद बनकर सामने आई थीं। जिसके बाद भाजपा ने सांसद डामोर का टिकट काट कर अनिता को प्रत्याशी बनाया।
रतलाम सीट से भाजपा की लोकसभा उम्मीदवार बनाई गईं अनिता नागर सिंह चौहान मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री नागर सिंह चौहान की पत्नी हैं जो कि दो बार से अलीराजपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष हैं। यहां ये भी बता दें कि इस बार हुए जिला पंचायत चुनाव में अनिता नागर को 13 में से 12 वोट मिले थे। मंत्री नागर सिंह चौहान इस क्षेत्र में पकड़ रखते हैं।
17 लोकसभा चुनाव और एक उपचुनाव में चार बार ही रतलाम झाबुआ सीट से गैर कांग्रेसी उम्मीदवार जीते है। जनसंघ और भाजपा के लिए यह सीट हमेशा चुनौतीपूर्ण रही है। दिलीप सिंह भूरिया सबसे ज्यादा सात बार कांग्रेस के सांसद रहे। फिर वर्ष 2014 में दिलीप सिंह भूरिया भाजपा में आए और चुनाव जीते, लेकिन उनके निधन के कारण उपचुनाव हुआ और कांग्रेस ने उपचुनाव में जीत दर्ज कराई। 2019 में भाजपा के डामोर ने इस सीट से जीत हासिल की।
इस सीट पर अभी तक तीन बार महिला उम्मीदवार को राजनीतिक दलों ने टिकट दिया है। कांग्रेस ने 1962 में पहली बार महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारा था। तब जमुनादेवी चुनाव जीती थी। तब यह सीट चर्चा में आई थी। इस सीट पर 1962 में टिकट बदलते हुए अमर सिंह के स्थान पर जमुना देवी को उम्मीदवार बनाया था। 2004 में दिलीप सिंह भूरिया के बजाए रेलम सिंह चौहान को टिकट दिया, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत पाई। अब भाजपा ने फिर महिला को टिकट दिया है।