भोपालः मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के चर्चित पत्र और उससे जुड़े पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय जनता पार्टी की नीतियों, मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
श्री पटवारी ने कहा कि वसुंधरा राजे द्वारा लिखा गया पत्र केवल एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि एक ऐसा दस्तावेज़ है, जो महिला आरक्षण की आड़ में संभावित अवैध परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दे की ओर संकेत करता है। इस पत्र में उठाए गए प्रश्न न केवल प्रासंगिक हैं, बल्कि लोकतंत्र की पारदर्शिता और निष्पक्षता से भी सीधे जुड़े हुए हैं। ऐसे में इस पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच अत्यंत आवश्यक है। श्री पटवारी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि 15 तारीख को लिखा गया यह पत्र जब सार्वजनिक हुआ और व्यापक स्तर पर चर्चा में आया, तो मात्र कुछ दिनों के भीतर ही वसुंधरा राजे द्वारा उसका खंडन कर दिया गया। यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या यह खंडन स्वेच्छा से किया गया या फिर किसी दबाव में आकर अपने ही शब्दों से पीछे हटने का निर्णय लिया गया? क्या भाजपा के अंदर सच्चाई को दबाने और असहमति की आवाज़ों को कुचलने की प्रवृत्ति इतनी गहरी हो चुकी है?
श्री पटवारी ने कहा कि अगर पत्र में लिखी गई बातें निराधार हैं, तो भाजपा को सामने आकर स्पष्ट तथ्यों के साथ उसका खंडन करना चाहिए। लेकिन अगर उसमें सच्चाई का अंश भी है, तो उसे दबाने या उससे ध्यान भटकाने के बजाय उस पर गंभीरता से विचार और कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण कानून वर्ष 2023 में पहले ही पारित हो चुका है, जिसे देश की सभी राजनीतिक पार्टियों ने समर्थन दिया था। ऐसे में अब इस मुद्दे को पुनः राजनीतिक रूप से उछालना और इसके साथ नए-नए कथानक गढ़ना भाजपा की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या यह जनता का ध्यान बेरोजगारी, महंगाई, गिरती अर्थव्यवस्था और अन्य ज्वलंत मुद्दों से भटकाने का प्रयास है?
श्री पटवारी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर की गई FIR को लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए कहा कि केवल एक पत्र को सोशल मीडिया पर साझा करने के लिए कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को निशाना बनाना भाजपा सरकार की असहिष्णुता और डर को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई न केवल पक्षपातपूर्ण है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सीधा हमला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब वही पत्र लाखों लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया है, तो कार्रवाई केवल चुनिंदा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर ही क्यों की जा रही है? क्या कानून का उपयोग अब राजनीतिक प्रतिशोध के औज़ार के रूप में किया जा रहा है? श्री पटवारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “अगर उस पत्र में लिखी गई बातें गलत हैं, तो सरकार को चाहिए कि वह बिना भेदभाव के हर उस व्यक्ति पर FIR दर्ज करे, जिसने उसे साझा किया है। लेकिन यदि उसमें सच्चाई है, तो उसे दबाने का प्रयास बंद किया जाए और देश की जनता के सामने पूरी पारदर्शिता के साथ तथ्य रखे जाएं।
उन्होंने आगे कहा कि यदि भाजपा सरकार को कार्रवाई करनी ही है, तो वह स्वयं उनके खिलाफ FIR दर्ज करे, क्योंकि उन्होंने भी इस पत्र को सार्वजनिक रूप से साझा किया है और उसके मुद्दों का समर्थन किया है। उन्होंने दोहराया कि कांग्रेस पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और किसी भी प्रकार के राजनीतिक दबाव या दमन से पीछे हटने वाली नहीं है। श्री पटवारी ने कहा कि भाजपा की यह पुरानी रणनीति रही है कि पहले किसी मुद्दे को उछालना, फिर जब राजनीतिक नुकसान की आशंका हो, तो अपने ही बयान, अपने ही नेताओं और अपने ही तथ्यों से मुकर जाना। लेकिन अब जनता इस रणनीति को समझ चुकी है और सच को छुपाने के हर प्रयास का जवाब देगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह पूरा घटनाक्रम केवल एक पत्र या एक FIR तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक नैतिकता से जुड़ा हुआ बड़ा सवाल है। यदि सत्ता में बैठी सरकारें इस प्रकार से चुनिंदा लोगों को निशाना बनाएंगी, तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए अत्यंत खतरनाक संकेत है। श्री पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस का प्रत्येक कार्यकर्ता इस मुद्दे पर एकजुट है और सच्चाई के साथ खड़ा है। कांग्रेस पार्टी न तो डरने वाली है और न ही झुकने वाली है। सत्य और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।