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अपनी पीड़ा बताने जनसुनवाई में पहुंचा लाचार युवक, बेपरवाह सिस्टम ने नहीं सुनी बात!

खेरू का दावा है कि उसने पिछले तीन वर्षों में दिन-रात मजदूरी कर भांजे की शादी के लिए करीब 5 लाख रुपये जोड़े थे, लेकिन यह उम्मीद उस वक्त टूट गई जब टोल टैक्स के पास कुछ अज्ञात लोगों ने उसे रोककर पूरी रकम छीन ली!

By: Naredra 
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अपनी पीड़ा बताने जनसुनवाई में पहुंचा लाचार युवक, बेपरवाह सिस्टम ने नहीं सुनी बात!

गुनाः जिले के कलेक्ट्रेट परिसर में मंगलवार को मजबूरी का एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को कुछ पल के लिए हैरान होने पर मजबूर कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक युवक, बदहवास और अर्धनग्न अवस्था में, हाथ में फटा हुआ आवेदन लिए न्याय की गुहार लगा रहा था। उसकी आवाज में गुस्सा कम और मज़बूरी ज्यादा थी। ऐसा लग रहा था मानो वह सिर्फ अपनी नहीं, बल्कि व्यवस्था से हार चुके हर इंसान की कहानी बता कर रहा हो।

इस युवक की पहचान गुना तहसील के ग्राम बरखेड़ागिर्द निवासी खेरू आदिवासी के रूप में हुई है। खेरू का दावा है कि उसने पिछले तीन वर्षों में दिन-रात मजदूरी कर करीब 5 लाख रुपये जोड़े थे। यह रकम उसके लिए सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि उम्मीदों का सहारा थी। क्योंकि इन्हीं पैसों से उसके भांजे की शादी होनी थी। लेकिन खेरू के मुताबिक, यह उम्मीद उस वक्त टूट गई जब टोल टैक्स के पास कुछ अज्ञात लोगों ने उसे रोककर पूरी रकम छीन ली। उसने आरोप लगाया कि बदमाशों ने न केवल पैसे लूटे, बल्कि उसके साथ मारपीट भी की और उसके कपड़े तक फाड़ दिए। यह घटना उसके लिए सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि आत्मसम्मान पर भी गहरी चोट बनकर सामने आई।

घटना के बाद न्याय की तलाश में परेशान खेरू संबंधित थाने पहुंचा, लेकिन उसका कहना है कि वहां उसकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया। उसका आरोप तो यहां तक है कि उसका आवेदन फाड़कर उसे थाने से भगा दिया गया। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई, तो वह सीधे गुना कलेक्ट्रेट पहुंच गया। शायद इस उम्मीद में कि यहां उसकी आवाज सुनी जाएगी।

कलेक्ट्रेट परिसर में जब उसने भीतर जाने की कोशिश की, तो सुरक्षा में तैनात गार्ड और अन्य कर्मियों ने उसे रोक दिया। इसके बाद गेट के बाहर ही उसका विरोध जारी रहा। कुछ देर में वहां भीड़ जुट गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। खेरू बार-बार अपनी आपबीती दोहराता रहा, कभी रोता, कभी गुस्से में चीखता-चिल्लाता रहा मानो उसकी पीड़ा शब्दों से बाहर निकलने का रास्ता खोज रही हो।

गुना कलेक्ट्रेट में उपस्थित अधिकारियों ने स्थिति को संभालने और युवक को शांत कराने की कोशिश की। जिसके कुछ समय बाद खेरू वहां से लौट गया, लेकिन अपने पीछे कई सवाल छोड़ गया। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस सिस्टम की भी झलक है, जहां आम आदमी की आवाज अक्सर भीड़ में खो जाती है। सच क्या है, यह जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल खेरू की यह तस्वीर, फटा आवेदन, अर्धनग्न शरीर और न्याय की गुहार, प्रशासनिक व्यवस्था पर कई असहज सवाल जरूर खड़े कर रही है।

गुना से संवाददाता रणधीर चंदेल की रिपोर्ट

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