सीहोरः जिले में भीषण गर्मी के दस्तक देते ही ग्रामीण अंचलों में जल संकट गहराने लगा है। कलेक्ट्रेट में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक हृदयविदारक दृश्य देखने को मिला, जब 12 गांवों की महिलाएं पानी की समस्या को लेकर सिर पर खाली बर्तन रखे पैदल मार्च करते हुए पहुंचीं।

प्यास से बेहाल एक महिला की बिगड़ी हालत
कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचने के दौरान चिलचिलाती धूप और प्यास के कारण एक महिला की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़ी। आनन-फानन में अन्य महिलाओं और उपस्थित लोगों ने उसे संभाला। यह घटना जिले में पानी की विकराल स्थिति और ग्रामीणों की बेबसी को बयां करने के लिए काफी थी।
ज्ञापन में ग्रामीणों की मुख्य मांगें
प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने जिला प्रशासन को अपनी पीड़ा बताते हुए एक ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांग है कि नए बोर उत्खनन हो, गांवों में जलस्तर नीचे जाने के कारण पुराने स्रोत सूख चुके हैं, इसलिए नए बोर कराने की मांग की गई। नियमित जलापूर्ति हो, भीषण गर्मी को देखते हुए वैकल्पिक साधनों से तुरंत पानी उपलब्ध कराया जाए। स्थायी समाधान की मांग भी की, जल संकट से जूझ रहे 12 गांवों में पाइपलाइन और अन्य स्थायी जल योजनाओं को गति दी जाए।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ता जल संकट
सीहोर जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों तापमान बढ़ने के साथ ही कुएं और हैंडपंप जवाब दे रहे हैं। दूर-दराज के इलाकों से पानी लाना महिलाओं की दैनिक चुनौती बन गई है। महिलाओं का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगी। फिलहाल, प्रशासन ने ज्ञापन पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
सीहोर से संवाददाता शरन तिवारी की रिपोर्ट