नई दिल्ली : कर्नाटक में लंबी खींचतान के बावजूद आखिरकार बीएस येदियुरप्पा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ये इस्तीफा तब हुआ है, जब आज ही कर्नाटक की बीजेपी सरकार (BJP Government) को दो साल पूरे हुए हैं, ऐसे में अब हर किसी की नज़र इस बात पर है कि अब बीजेपी राज्य की कमान किसे सौंपती है। आपको बता दें कि अपने इस्तीफे का ऐलान एक समारोह में भाषण देते हुए की।
येदियुरप्पा ने भावुक होते हुए कहा कि, ‘मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है। मैं लंच के बाद राज्यपाल से मुलाकात करूंगा। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे 75 साल की उम्र के बाद भी पद पर बने रहने दिया। मैं भविष्य में पार्टी निर्माण गतिविधियों में शामिल रहूंगा।’
कौन होगा येदियुरप्पा का उत्तराधिकारी?
खास बात ये है कि आज येदियुरप्पा सरकार के कार्यकाल के दो साल पूरे हो गए हैं। सरकार की दूसरी वर्षगांठ पर येदियुरप्पा आलाकमान के आगे झुक गए। अब कर्नाटक का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसपर कल तक फैसला हो जाएगा। खबर मिल रही है कि बीजेपी के पर्यवक्षक कल कर्नाटक जाएंगे। यहां विधायक दल की बैठक में नए मुख्यमंत्री के नाम पर मुहर लगेगी। इसके बाद शाम को शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया जाएगा।
इन तीन नामों की हो रही चर्चा
अगले मुख्यमंत्री के तौर पर रविवार तक तीन नाम सामने आए थे। पहला नाम है बसवराज बोम्मई का, जो लिंगायत समुदाय से आते हैं और अभी कर्नाटक सरकार में गृह मंत्री होने के साथ-साथ संसदीय कार्य मंत्री और कानून मंत्री भी हैं। दूसरा नाम विश्वेश्वरा हेगड़े कगेरी का है, जो ब्राह्मण हैं और कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष हैं। तीसरा नाम है केंद्रीय कोयला खनन मंत्री और संसदीय कार्य मंत्री प्रह्रलाद जोशी का।
माना जा रहा है कि RSS भी येदियुरप्पा की जगह लिंगायत समुदाय से ही आने वाले किसी और मंत्री या विधायक को मुख्यमंत्री बनाना चाहता है। लेकिन सूत्र बताते हैं कि इस बार बीजेपी गैर-लिंगायत को मुख्यमंत्री बनाने के बारे में भी सोच रही है।
बता दें कि कर्नाटक की सियासत को लेकर लंबे वक्त से कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हाल ही में बीएस. येदियुरप्पा ने नई दिल्ली आकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। तभी ये बात कही जा रही थी कि अब येदियुरप्पा अपना पद छोड़ सकते हैं।
जब से बीएस. येदियुरप्पा के इस्तीफे की अटकलें तेज़ हुई थी, तभी से लिंगायत समुदाय के लोगों का बीएस. येदियुरप्पा से मिलना जारी था। ऐसे में इन मुलाकातों को केंद्रीय नेतृत्व को दिए जा रहे एक संदेश के तौर पर देखा जा रहा था। हालांकि, बाद में बीएस. येदियुरप्पा ने साफ किया था कि अगर केंद्रीय नेतृत्व तय करेगा तो वह इस्तीफा दे देंगे।
बता दें कि 2018 के विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार बनी थी, लेकिन ये सरकार एक साल ही चल पाई थी और बाद में बीजेपी ने बीएस. येदियुरप्पा की अगुवाई में अपनी सरकार बना ली थी।