भीमा कोरेगांव मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने गौतम नवलखा और आनंद तेलतुम्बडे की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है।
इस मालमें में पुलिस ने दावा किया था कि, परिषद में 31 दिसंबर 2017 को दिए गए भड़काऊ भाषणों की वजह से अगले दिन पुणे जिले के भीमा-कोरेगांव गांव के आसपास जातीय हिंसा भड़की थी। भीमा कोरेगांव की लड़ाई के दो सौ साल पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में हिंसा भड़की।
बता दें कि, हिंसा में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी और कुछ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मामले में कार्यकर्ताओं और शिक्षाविद शोमा सेन, रोना विल्सन, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा और गौतम नवलखा को भी गिरफ्तार किया गया था। गोन्जाल्विस के वकील मिहिर देसाई ने उच्च न्यायालय में कहा कि पुणे पुलिस ने उनके खिलाफ पूरे मामले को कुछ ई-मेल और पत्रों के आधार पर तैयार किया जो अन्य लोगों के कंप्यूटरों से मिले थे।