नई दिल्ली : अरबों रुपये लेकर अफगानिस्तान से फरार हुए पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी के भाई हशमत गनी अहमदजई ने कथित तौर पर तालिबान का हाथ थाम लिया है। जिससे अशरफ गनी की मुसीबत बढ़ सकती है। बताया जा रहा है कि हशमत ने तालिबान को समर्थन का फैसला अल्हाज खलील-उर रहमान हक्कानी के साथ हुई मीटिंग के बाद लिया है।
ऐसी खबरें आ रही हैं कि अशरफ गनी के भाई हश्मत गनी अहमदजई तालिबान के साथ मिल गए हैं और आतंकियों की मदद करने का वादा किया है। इस दौरान तालिबान के नेता खलील उर रहमान और इस्लामिक विद्वान मुफ्ती महमूद जाकिर मौजूद थे। अशरफ गनी इन दिनों परिवार के साथ संयुक्त अरब अमीरात में जीवन बिता रहे हैं।
The brother of Ashraf Ghani has joined Taliban. He pledged his support after meeting Alhaj Khalil ur rehman Haqqani. pic.twitter.com/Wl3SBOMCQp
— Muhammad Jalal (@MJalal700) August 21, 2021
बता दें कि अशरफ गनी पहले ही देश छोड़कर भाग गए हैं। वह यूएई में हैं। हाल ही में खुद यूएई की तरफ से पुष्टि की गई थी और कहा गया था कि मानवीय आधारों पर उन्हें यहां शरण दी गई है। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के गनी के देश छोड़ने को लेकर उनकी काफी आलोचना भी हो रही है। आरोप यह भी लगे हैं कि वह अपने साथ भारी मात्रा में कैश लेकर भागे हैं। हालांकि गनी ने इन आरोपों से इनकार किया है।
गनी ने अपने बचाव में कहा था कि वह काबुल के लोगों की जान बचाने और हिंसा को टालने की वजह से देश छोड़कर गए हैं। अशरफ गनी ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि वे अपने जूते तक नहीं पहन पाए थे और उन्हें अफगानिस्तान से जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। अशरफ गनी ने बुधवार को एक वीडियो मैसेज जारी करके कहा था कि काबुल को तालिबान ने घेर लिया था और वह रक्तपात को रोकने के लिए देश छोड़कर गए।
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद तालिबान वहां सरकार बनाने में जुट गया है। अफगानिस्तान का राष्ट्रपति कौन होगा इसपर चर्चा जारी है। हाल ही में तालिबानी नेता पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई और अब्दुल्लाह से मिले थे। ऐसे में हशमत गनी के कथित तौर पर तालिबान में शामिल होने से तालिबान को और ताकत मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि अधिकांश देश अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार को मान्यता देने के पक्ष में नहीं हैं।