नई दिल्ली : तकरीबन दो महीनों से किसान लगातार अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर हैं, जिसे लेकर किसान और सरकार के बीच 11वें दौर की बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन ये सभी बैठक बेनतीजा रहा। आपको बता दें कि 11वें दौर की बैठक के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि वार्ता बेनतीजा रही जिसका हमें दुख है। किसान संगठन चाहते हैं कि तीनों कृषि कानून वापस लिए जाए। लेकिन सरकार संशोधन का प्रस्ताव दे रही है। हमने 2 साल तक कानून को होल्ड करने की बात भी कही, लेकिन उसे भी नकार दिया गया।

वहीं दूसरी तरफ किसान अपनी मांगों को लेकर ट्रैक्टर रैली की योजना बना रहें है, जिसे लेकर उसने सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया। सुप्रीम कोर्ट ने साफ लफ्जों में कह दिया कि इस बात पर निर्णय दिल्ली पुलिस को लेना है। वहीं दिल्ली पुलिस किसानों के ट्रैक्टर रैली को लेकर केएमपी एक्सप्रेसवे का ऑप्शन दे रही है, जबकि किसान रिंग रोड पर रैली निकालने को अड़े हैं।
इसी बीच सिंघु बॉर्डर से एक और किसान की आत्महत्या की खबरें सामने आई है, जो किसान आंदोलन के शुरूआत के साथ ही इस आंदोलन से जुड़े थें। आपको बता दें कि इस किसान कार्यकर्ता का नाम रतन सिंह है, जिसने 72 साल की उम्र में यह बड़ा कदम उठाया। खबर जब अमृतसर के उनके गांव कोटली ढोले शाह पहुंची तो लोगों में शोक की लहर दौड़ गई।
आपको बता दें कि इस आंदोलन में अभी तक कई किसानों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। जिसके बाद से लोगों ने यह भी कयास लगाना शुरू कर दिया हैं कि इस तरह के आत्मघाती कदम इन किसानों ने किसी तरह की बयान या उकसावे को लेकर उठाया होगा। हालांकि बात जो भी हो, लेकिन हम इस तरह के कदम की निंदा करते है।