नई दिल्ली : 12वें दौर की बातचीत के बाद गोगरा पेट्रोलिंग प्वाइंट-17A से भारत-चीन की सेना पीछे हट गए हैं। आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच 12वें दौर की सैन्य स्तर की बातचीत में इस पर सहमति बनी थी। जो वार्ता दोनों देशों के बीच कॉर्प्स कमांडर के बीच हुआ था। इस 12वें राउंड की वार्ता के बाद दोनों देशों के सैनिक गोगरा में पीछे हटे हैं। इसके साथ ही गोगरा में निर्मित सभी अस्थायी स्ट्रक्चर को भी हटा दिया है।
सेना की ओर से यह कहा गया कि भारत और चीन के बीच शनिवार को 12वें दौर की सैन्य वार्ता के परिणामस्वरूप दोनों पक्ष पूर्वी लद्दाख में गोगरा इलाके से सैनिक हटाने पर सहमत हुए हैं। दोनों पक्षों द्वारा निर्मित सभी अस्थायी ढांचों, अन्य अवसंरचनाओं को नष्ट कर दिया गया है और परस्पर तरीके से सत्यापित किया गया है। भारतीय और चीनी पक्ष ने गोगरा में अग्रिम मोर्चे पर सैनिकों की तैनातियों को चरणबद्ध, समन्वित और सत्यापित तरीके से रोका है।

भारतीय सेना ने आगे कहा कि, गोगरा में दोनों पक्षों ने स्थलाकृति को गतिरोध-पूर्व अवधि के अनुरूप कर दिया है। समझौतों में यह सुनिश्चित किया गया है कि इस इलाके में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) का सख्ती से अनुपालन किया जाए और दोनों पक्षों द्वारा सम्मान किया जाए।
भारतीय सेना ने कहा कि भारत और चीन, दोनों देशों ने वार्ता को आगे बढ़ाने और पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर शेष मुद्दों का समाधान करने की प्रतिबद्धता जताई है। भारतीय थल सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के साथ राष्ट्र की संप्रभुता बनाए रखने और पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर शांति बरकरार रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
As per agreement reached during Corps Commander talks, both sides (India-China) ceased forward deployments in PP-17 in phased, coordinated & verified manner. Disengagement process was carried out over 4-5 Aug’21. Both sides are now in their respective permanent bases: Indian Army pic.twitter.com/ihNRWKbLNh
— ANI (@ANI) August 6, 2021
गौरतलब है कि पिछली बैठक में चीन ने पैंगोंग-त्सो इलाके को छोड़कर किसी दूसरे इलाके में विवाद होने से इनकार किया था। लेकिन भारत और चीन के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बैठक के बाद सैन्य कमांडर्स की मीटिंग पर सहमति बनी थी। इसके बाद शनिवार हुई बैठक के बाद गोगरा पेट्रोलिंग प्वाइंट-17ए से दोनों देशों के जवान पीछे हटे हैं।
आपको बता दें कि भारत और चीन के बीच एलएसी विवाद के निपटारे के लिए अब तक कूटनीतिक और सैन्य स्तर की लगातार वार्ताएं हुई हैं। कुछ जगहों से दोनों देशों की सैनिकों की वापसी भी हुई और जवान पुराने ठिकाने पर चले गए। लेकिन, हॉट स्प्रिंग और गोगरा में अभी तक सहमति नहीं बन पाई थी। पिछले साल जून में दोनों देशों के बीच हिंसक झड़प हो गई थी, जो पिछले कई दशकों में ऐसी पहली घटना थी। इस घटना में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे जबकि चीन के करीब 40 पीएलए जवान मारे गए थे। हालांकि, चीन ने कभी भी दुनिया के सामने अपनी सैनिकों मौत का वास्तविक आंकड़ा नहीं दिया।