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84 साल की उम्र में हुआ एक्टिविस्ट स्टेन स्वामी का निधन, भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में हुई थी एक साल पहले गिरफ्तारी

By: Amit ranjan 
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84 साल की उम्र में हुआ एक्टिविस्ट स्टेन स्वामी का निधन, भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में हुई थी एक साल पहले गिरफ्तारी

नई दिल्ली : एक साल पहले भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़े मामले में गिरफ्तार किए गए एक्टिविस्ट फादर स्टेन स्वामी (Stan Swamy) का निधन हो गया है। हाल ही में बहुत ज्यादा तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन सोमवार दोपहर को बॉम्बे हाईकोर्ट को जानकारी दी गई है कि उनका निधन हो गया है।

स्टेन स्वामी के निधन पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दुख जताया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”फादर स्टेन स्वामी के निधन पर संवेदना। वह न्याय और मानवता के पक्षधर थे।”

बता दें कि 84 साल के स्टेन स्वामी को 30 मई को बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश पर ही मुंबई के होली फैमिली अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जिनके इलाज का खर्चा उनके सहयोगी एवं मित्र उठा रहे थे। लंबे इलाज के बाद उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं आया था, जिसके बाद सोमवार यानी 5 जुलाई 2021 को उनका निधन हो गया।

लंबे वक्त से बीमार चल रहे फादर स्टेन स्वामी को रविवार को ही वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। शनिवार को ही स्टेन स्वामी को वकील मिहिर देसाई ने शनिवार को जस्टिस एस एस शिंदे और जस्टिस एन जे जमादार की पीठ को बताया था कि स्वामी की हालत नाजुक बनी हुई है और वह अब भी अस्पताल के गहन देखभाल कक्ष (आईसीयू) में हैं। पीठ ने मंगलवार को स्वामी की चिकित्सीय आधार पर दायर जमानत याचिका पर सुनवाई टाल दी थी और तब तक उन्हें अस्पताल में रहने को कहा था।

बता दें कि मई में, स्वामी ने उच्च न्यायालय की अवकाश पीठ को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बताया था कि तलोजा जेल में उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता रहा। उन्होंने उच्च न्यायालय से उस वक्त अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया था और कहा था कि अगर चीजें वहां ऐसी ही चलती रहीं तो वह ‘‘बहुत जल्द मर जाएंगे।”

भीमा कोरेगांव हिंसा से जुड़ा था नाम

राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) ने फादर स्टेन स्वामी को अक्टूबर 2020 में गिरफ्तार किया था, तब से उन्हें तालोजा जेल हॉस्पिटल में रखा गया था। 31 दिसंबर, 2017 में पुणे में एलगार परिषद के कार्यक्रम में दिए गए भाषणों को आधार बनाते हुए स्टेन स्वामी पर केस दर्ज किया गया था। NIA द्वारा स्टेन स्वामी पर UAPA के तहत केस दर्ज किया गया था।

इसी कार्यक्रम के एक दिन बाद भीमा-कोरेगांव में भयानक हिंसा हुई थी, जिसमें काफी लोगों की जान गई थी और बड़ा बवाल हुआ था। पुणे पुलिस ने इस मामले में खुलासा किया था कि इस पूरी साजिश में माओवादियों का भी कनेक्शन था। इसी कनेक्शन को लेकर स्टेन स्वामी पर नकेल कसी गई थी।

गौरतलब है कि स्टेन स्वामी की गिनती देश के उन एक्टिविस्ट में होती है, जिन्होंने लंबे वक्त तक आदिवासियों, दलितों और अन्य पिछड़े तबके के लोगों के लिए आवाज़ उठाई। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले स्टेन स्वामी ने गरीब तबके के बच्चों के लिए स्कूल चलाने का भी काम किया।

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