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प्रकृति, संस्कृति और समाज का अद्भुत संगमः आदि रंग महोत्सव का भव्य आगाज़

जनजातीय कला में झलकी परंपरा और प्रकृति का सम्मान, घोड़ाडोंगरी बना सांस्कृतिक चेतना का केंद्र।

By: Naredra 
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प्रकृति, संस्कृति और समाज का अद्भुत संगमः आदि रंग महोत्सव का भव्य आगाज़

बैतूलः घोड़ाडोंगरी में तीन दिवसीय आदि रंग महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। जहां सतपुड़ा ग्राउंड जनजातीय संस्कृति के रंगों से सराबोर नजर आया। जनजातीय कार्य विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस महोत्सव का शुभारंभ केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके और विधायक गंगा सज्जन सिंह उईके ने दीप प्रज्वलित कर किया। 4 से 6 अप्रैल तक चलने वाला यह महोत्सव जनजातीय कला, संस्कृति और परंपराओं को नई पहचान देने का सशक्त मंच बनकर उभर रहा है।

इस मौके पर केंद्रीय राज्यमंत्री दुर्गादास उईके ने कहा कि यह महोत्सव केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और समाज के गहरे संबंधों का उत्सव है, जिसमें जनजातीय जीवन की आत्मा बसती है। उन्होंने जनजातीय समाज को प्रकृति का सच्चा संरक्षक बताते हुए कहा कि उनकी परंपराएं हमें धरती को मां मानने और उसके साथ संतुलन में जीने का संदेश देती है।

विधायक गंगा सज्जन सिंह उईके ने जनजातीय संस्कृति को भारत की असली पहचान बताते हुए कहा कि आज विश्व जिस सतत विकास की बात कर रहा है, उसका मूल हमारे जनजातीय समाज की जीवन शैली में निहित है। महोत्सव में गोंडी, ठेपिया और झांझ पाटा जैसे पारंपरिक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं भगवान बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन ने सभी को प्रेरित किया।

बैतूल से संवाददाता कमलाकर तायवाड़े की रिपोर्ट

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