मुकेश नायक ने कहा कि अगर आजादी के 70-80 साल बाद देश का यह हाल है कि दलित समाज का बच्चा घोड़े पर बैठकर किसी के सामने से नहीं निकल सकता है। तो आज हम कितना आगे बढ़े हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।
मुकेश नायक ने कहा कि अगर आजादी के 70-80 साल बाद देश का यह हाल है कि दलित समाज का बच्चा घोड़े पर बैठकर किसी के सामने से नहीं निकल सकता है। तो आज हम कितना आगे बढ़े हैं इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।
जनजातीय कला में झलकी परंपरा और प्रकृति का सम्मान, घोड़ाडोंगरी बना सांस्कृतिक चेतना का केंद्र।
रामेश्वर धाम महाराज ने हिंदू राष्ट्र के विषय पर अपने विचार रखते हुए समाज में एकता, धर्म और संस्कारों के महत्व पर जोर दिया।
संगोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और विद्वानों ने “आनंद” के विभिन्न आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता तथा जीवन मूल्यों पर विस्तार से चर्चा की।