प्रकृति, संस्कृति और समाज का अद्भुत संगमः आदि रंग महोत्सव का भव्य आगाज़ जनजातीय कला में झलकी परंपरा और प्रकृति का सम्मान, घोड़ाडोंगरी बना सांस्कृतिक चेतना का केंद्र।